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मजदूरों की हूंकार: गौतमबुद्ध नगर के गिरफ्तार श्रमिकों की रिहाई और 26 हजार न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर हुआ जोरदार प्रदर्शन

  • मजदूरों की हूंकार: गौतमबुद्ध नगर के गिरफ्तार श्रमिकों की रिहाई और 26 हजार न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर हुआ जोरदार प्रदर्शन

तेजस टूडे मण्डल ब्यूरो
मुसैब अख्तर
गोण्डा। गौतमबुद नगर के मज़दूर आंदोलन में गिरफ्तार हजारों मजदूरों को तुरंत रिहा करो
केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों का अखिल भारतीय मांग दिवस में न्यूनतम वेतन रूपये 26000 प्रति माह और काम के घंटे 8 करो गोंडा। केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर अखिल भारतीय मांग दिवस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों कर्मचारियों की आयोजन समिति देवीपाटन मंडल गोण्डा द्वारा उप श्रमायुक्त देवीपाटन मंडल गोण्डा परिसर में धरना प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन उप श्रमायुक्त अनुभव वर्मा के माध्यम से दिया गया।
इस मौके पर कहा गया कि गौतमबुद्ध नगर में आन्दोलन के दौरान गिरफ्तार किये गये सभी मजदूरों एवं कार्यकर्ताओं को बिना शर्त तत्काल रिहा किया जाय। उनके ऊपर लगाये गये झूठे मुकदमें वापस लिये जायं। मजदूरों का दमन एवं उत्पीड़न करने वाली कार्रवाईयों पर रोक लगाई जाय। चारों श्रम-संहिता वापस ली जायं। सरकार त्रिपक्षीय वार्ताओं को आयोजित करे। भारत सरकार से भारतीय श्रम सम्मेलन तत्काल बुलाने के लिए कहा जाय। न्यूनतम वेतन 26 हजार रूपये प्रतिमाह से कम न हो, 8 घंटे कार्य-दिवस का सख्ती से पालन किया जाय। अतिरिक्त काम के लिए दुगुना ओवर-टाइम का भुगतान किया जाय।
कार्य स्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा की गारंटी की जाए। साप्ताहिक अवकाश, ई.एस.आई. पी.एफ., बोनस आदि सुविधायें मजदूरों को दी जाएं, ठेका प्रणाली पर रोक लगाई जाये , संविदा-श्रमिकों को समान काम के लिए समान वेतन दिया जाय। अस्थाई प्रकृति के काम पर रखे गये संविदा कर्मचारियों का नियमितिकरण कर उनको स्थाई किया जाय। मजदूरों को सस्ती रसोई गैस उपलब्ध कराई जाय एवं आवश्यक वस्तुओं के दामों को नियंत्रित किया जाय। महंगाई पर रोक लगाई जाय।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए एटक के वरिष्ठ नेता कॉमरेड सत्य नारायण त्रिपाठी ने कहा कि नए लेबर कोड में ठेकेदारों और मालिकों को मजदूरों के शोषण का अधिकार देने से आक्रोश और भी बढ़ेगा जिसे रोक पाना सरकार के लिए आसान नहीं होगा। सीटू प्रदेश उपाध्यक्ष कॉमरेड कौशलेंद्र पांडेय ने कहा कि 1998 में अटल बिहारी वाजपाई सरकार द्वारा नई श्रम नीति के लिए जस्टिस रविन्द्र वर्मा के नेतृत्व में गठित कमेटी के रिपोर्ट को 2002 में लागू किया जाना था परन्तु ट्रेड यूनियनों के भारी विरोध के कारण किसी भी सरकार की हिम्मत 17 वर्षों तक नहीं हुई मगर मोदी सरकार बिहार चुनाव जीतने के बाद नया लेबर कोड लागू कर दिया और पश्चिम बंगाल के चुनाव के बाद नए लेबर कोड को नोटिफाई भी कर दिया जो मेहनतकश जनता के लिए ठीक नहीं है।
पूर्वांचल चीनी मिल मजदूर यूनियन महामंत्री ईश्वर शरण शुक्ला, यूपीएमएसआरए सचिव विनीत तिवारी, सफाई कर्मचारी यूनियन के पिंटू बाल्मिकी, किसान सभा के अमित शुक्ला आदि ने नए लेबर कोड को तुरंत रद्द करने की मांग किया। प्रदर्शन में संजीव शुक्ला, विनय मिश्रा, अम्बरीष तिवारी, रविन्द्र, आनंद त्रिपाठी, रमेश चौबे, अंगद तिवारी, सुशील सिंह आदि शामिल रहे।

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