पुलिस हिरासत में वारंटी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत

पुलिस हिरासत में वारंटी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत

पोस्टमार्टम के लिये पुलिस को शव न सौंपने की जिद पर परिजन अड़े
तेजस टूडे ब्यूरो
प्रमोद गोस्वामी
सन्त कबीर नगर। महुली थाना क्षेत्र के ग्राम नगुआ निवासी एक वारंटी की शनिचरा बाबू पुलिस चौकी में हिरासत के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजन चौकी पुलिस पर बीमार वारंटी को जबरिया उठा ले जाने का आरोप लगा रहे हैं। घटना को लेकर पुलिस की कार्यशैली से ग्रामीण अक्रोषित नजर आ रहे हैं। ग्रामीण मृतक के बेटों के मौके पर नही पहुंचने तक शव को पीएम नही होने देने की जिद पर अड़े हुए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार सोमवार की शाम शनिचरा बाबू पुलिस चौकी के सिपाही गांव निवासी मतई पुत्र मोती लाल और राम किशुन पुत्र बुझई के घर पहुंचे। पुलिस ने दोनों लोगों को न्यायालय के वारंट का हवाला देकर मंगलवार की सुबह पुलिस चौकी शनिचरा बाबू पहुंचने का निर्देश दिया। वारंटी मतई का आरोप कि राम किशुन हार्ट की बीमारी के चलते अस्वस्थ थे। वह अपने घर के भीतर खाना खा रहा था कि अचानक लगभग 8 बजे सुबह चौकी प्रभारी दो सिपाहियों के साथ उसके घर पहुंचे और पत्नी को धक्का देकर घर में घुस गए। उसे बिना खाना खाए ही जबरिया बाइक पर बैठाकर राम किशुन के घर पहुंचे। जब बीमार राम किशुन को साथ ले जाने का प्रयास करने लगे तो परिजनों ने उनके बीमारी का हवाला देकर दवा खिलाने के लिए समय मांगा।
आरोप है कि पुलिस ने उन्हें दवा भी नही खाने दिया और जबरिया बाइक पर बैठाकर पुलिस चौकी शनिचरा लेकर चले गए। साथी वारंटी मतई का कहना है कि चौकी पर पहुंचते ही राम किशुन की तबियत बिगड़ गई। हालत गंभीर देख चौकी के सिपाही उन्हें चौराहे के ही एक प्राइवेट चिकित्सक की क्लीनिक पर ले गये जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि चिकित्सक द्वारा मृत घोषित करते ही पुलिस शव को वहीं छोड़कर निकल गई। सूचना पर पहुंचे ग्रामीणों ने शव को मृतक राम किशुन के घर पहुंचाया। सूचना पाकर पहुंचे पुलिस क्षेत्राधिकारी प्रियम शेखर पांडेय और थानाध्यक्ष रजनीश राय ने पोस्टमार्टम के लिए परिजनों को समझना शुरू कर दिया। घर में मौजूद मृतक की पत्नी और पुत्री ने दिल्ली में रह रहे चारों बेटों के आने के बाद ही पोस्टमार्टम कराने की जिद पर अड़ी रही। मौके पर पहुंचे अपर पुलिस अधीक्षक सुशील सिंह ने भी समझाने का प्रयास किया। समाचार लिखे जाने तक परिजन पोस्टमार्टम के लिए शव नही दिए जाने की जिद पर अड़े हुए थे।

——इनसेट——
14 साल पहले हुई मारपीट के मुकदमे में था वारण्ट
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2011 में दो पक्षों में मारपीट हो गई थी जिसमें बाद में सुलह भी हो जाने की बात बताई जा रही है। उसी मामले में एक पक्ष के 5 लोगों का न्यायालय से वारंट जारी था। तीन वारंटी गांव से बाहर थे जबकि दोनो वारंटियों को चौकी पुलिस अपनी हिरासत में लेकर पुलिस चौकी शनिचरा बाबू पहुंची थी।

——इनसेट——
पुलिस छावनी में तब्दील हुआ नगुआ गांव
घटना की सूचना मिलते ही आस—पास के गांवों के लोगों की भीड़ मृतक के घर पर इकट्ठा होने लगे। लोगों में पुलिस की असंवेदनशीलता के खिलाफ आक्रोश नजर आने का लगा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महुली और धनघटा थाने की पुलिस को मौके पर तैनात कर दिया गया। नगुआ गांव पूरी तरह से छावनी में तब्दील हो गया।

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