माया की काया…
अर्थी मेरी आज देखो उठी है,
जल मैं रहा हूँ, कल तू भी जलेगा।
जहाँ से मैं आया था,वहीं जा रहा हूँ,
पहिया ये वक़्त का फिर न घूमेगा।
माया की काया ये, काया की माया,
अपने मैं रुतबे से जग को डराया।
कौड़ी न जाएगी, बहुत ही खलेगा,
पहिया ये वक़्त का फिर न घूमेगा।
अर्थी मेरी आज देखो उठी है,
जल मैं रहा हूँ, कल तू भी जलेगा।
जहाँ से मैं आया था,वहीं जा रहा हूँ,
पहिया ये वक़्त का फिर न घूमेगा।
तप-त्याग-संयम,न घाटे का सौदा,
गया काम से जो इसको है रौंदा।
बोया जो काँटा, यकीनन धंसेगा,
पहिया ये वक़्त का फिर न घूमेगा।
अर्थी मेरी आज देखो उठी है,
जल मैं रहा हूँ, कल तू भी जलेगा।
जहाँ से मैं आया था,वहीं जा रहा हूँ,
पहिया ये वक़्त का फिर न घूमेगा।
रामकेश एम. यादव मुम्बई,
मो.नं. 7045535450
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