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सुख-सुविधाएं छोड़ उद्यमी बनीं सुप्रिया राय, ‘आयुकृति ऑर्गेनिक’ से बदल रहीं किसानों की तकदीर

  • सुख-सुविधाएं छोड़ उद्यमी बनीं सुप्रिया राय, ‘आयुकृति ऑर्गेनिक’ से बदल रहीं किसानों की तकदीर

  • भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान ने ‘महिला किसान उद्यमी सम्मान’ से किया सम्मानित

तेजस टूडे ब्यूरो
रामनगर, वाराणसी। अपनी सुविधा संपन्न जिंदगी को छोड़कर स्वरोजगार और समाज सेवा की राह चुनने वालीं ‘आयुकृति ऑर्गेनिक’ की प्रबंध निदेशक सुप्रिया राय पूर्वांचल के किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं। कृषि और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए हाल ही में उन्हें भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी में ‘महिला किसान उद्यमी सम्मान’ से नवाजा गया है। आईसीएआर के महानिदेशक मांगीलाल जाट ने भी उनके इस साहसिक कदम और अथक प्रयासों की प्रशंसा करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।
रामनगर इंडस्ट्रियल एरिया (फेज-वन) में स्थित ‘आयुकृति ऑर्गेनिक’ एक अनूठी खाद्य प्रसंस्करण यूनिट है। सुप्रिया जी के नेतृत्व में चल रही इस यूनिट के माध्यम से वर्तमान में 20 लोगों को प्रत्यक्ष और 50 लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। इस यूनिट में आधुनिक ‘डिहाइड्रेशन’ तकनीक का उपयोग करके ताजे फलों, सब्जियों और पत्तियों को सुखाकर उनका स्वास्थ्यवर्धक पाउडर तैयार किया जाता है। इस पाउडर का सीधा उपयोग स्वास्थ्य संवर्धन के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त फूड, फीड, फार्मा और कॉस्मेटिक इंडस्ट्रीज भी अपने उत्पादों में वैल्यू एडिशन के लिए इसे बड़े पैमाने (बल्क) पर खरीदती हैं।

इस उद्यम का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय किसानों को मिल रहा है। ‘आयुकृति ऑर्गेनिक’ के जरिए किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य तो मिल ही रहा है। साथ ही वे पारंपरिक खेती से हटकर वैकल्पिक खेती की ओर भी प्रेरित हो रहे हैं। क्षेत्र के किसान अब अश्वगंधा, मोरिंगा (सहजन) और सफेद मूसली जैसी औषधीय और नकदी फसलों की खेती कर रहे हैं जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उद्यमिता के साथ सुप्रिया राय सामाजिक कार्यों में भी अग्रणी हैं। वह उत्तर प्रदेश औद्योगिक एसोसिएशन की संस्थापक अध्यक्षा हैं और ‘हित चिंतक फाउंडेशन’ के माध्यम से निरंतर समाज सेवा के कार्यों से जुड़ी हुई हैं। हाल ही में ग्रेटर नोएडा के एक्सपो सेंटर में आयोजित ‘उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो’ के चौथे संस्करण में भी उन्होंने अपनी उद्यमशीलता की छाप छोड़ी। वहां उन्होंने आयुकृति ऑर्गेनिक का स्टॉल लगाकर चंदौली और वाराणसी सहित पूरे पूर्वांचल का शानदार प्रतिनिधित्व किया और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच प्रदान किया। उनके इन प्रयासों से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, बल्कि आम जनमानस तक शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ भी पहुंच रहे हैं।

 

 

 

 

 

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