भारत से उठी आवाज पूरी दुनिया की बनी संकल्प: संतोष
जेआरसी के अथक व असाधारण प्रयासों से मिली वैश्विक मान्यता
‘अन्तरराष्ट्रीय दिवस’ घोषित करने के ऐतिहासिक कदम का संस्था ने किया स्वागत
तेजस टूडे सं.
विनोद कुमार
केराकत, जौनपुर। स्थानीय क्षेत्र की चर्चित आस्था महिला एवं बाल विकास संस्था द्वारा जनपद मे बाल विवाह के खिलाफ जमीनी अभियान चला रही हैं। इसी क्रम में शिक्षक दिवस पर संस्था ने सुखमय डीग्री कॉलेज एवं कृषक इंटर कॉलेज में कार्यक्रम करके संयुक्त राष्ट्र के 27 नवंबर को ‘बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह की समाप्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस’ घोषित करने के ऐतिहासिक कदम का स्वागत किया है। संगठन ने कहा कि यह सरकार व प्रशासन के सहयोग से देश में बाल विवाह के खिलाफ अभियान चला रहे नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के अथक और असाधारण प्रयासों को वैश्विक मान्यता है। संगठन आस्था महिला एवं बाल विकास संस्था जेआरसी का एक सहयोगी संगठन है। जेआरसी लंबे समय से इस दिवस की मांग कर रहा था।
आस्था महिला एवं बाल विकास संस्था के निदेशक संतोष पाण्डेय ने कहा कि भारत से उठी आवाज आज पूरी दुनिया का संकल्प बन गई है। उन्हें खुशी है कि आज उनके प्रयासों को वैश्विक मान्यता मिली है। साथ ही यह पूरे भारत के लिए भी गर्व का विषय है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र ने बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक दिवस के लिए 27 नवंबर की तारीख चुनी। 2024 में इसी दिन भारत सरकार ने जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन जैसे नागरिक समाज संगठनों को साथ लेकर ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान की शुरुआत की थी लेकिन यह जश्न मनाकर रुक जाने का क्षण नहीं है। संयुक्त राष्ट्र की घोषणा ने हमें गौरव दिया है। अब हमारी जिम्मेदारी है कि दुनिया के हर बच्चे को बाल विवाह मुक्त बचपन भी मिले।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने बाल विवाह के खात्मे के लिए एक अलग अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की पहल की थी। मार्च 2026 में संयुक्त राष्ट्र में भुवन ऋभु ने अपने संबोधन के दौरान कई वैश्विक नेताओं की मौजूदगी में एक बार फिर बाल विवाह के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने के लिए प्रस्ताव लाने की बात कही। तब अफ्रीकी देश सिएरा लियोन की फर्स्ट लेडी डॉ. फातिमा मादा बायो भी मौजूद थीं जिन्होंने इस पहल का समर्थन किया। इसके बाद सिएरा लियोन ने भारत सहित 67 देशों के अनुमोदन वाला प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किया जिसमें 27 नवंबर को बाल विवाह समाप्त करने के लिए समर्पित वैश्विक दिवस घोषित करने की बात थी। 4 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र ने इस प्रस्ताव को पारित कर दिया।
भारत में जेआरसी अपने सहयोगी संगठनों के साथ देश के सभी 782 जिलों में बाल विवाह के खिलाफ अभियान चला रहा है। जेआरसी ने अपने सहयोगी संगठनों के साथ सरकारों और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से समुदायों, स्कूलों, पंचायतों, आदिवासी और वंचित समुदायों, महिलाओं, पुलिसकर्मियों, धर्मगुरुओं और जनप्रतिनिधियों को बाल विवाह रोकने के लिए एकजुट किया है। जेआरसी के सहयोगी संगठनों ने देश में 5,50,000 से अधिक बाल विवाह रुकवाएं हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि जब सरकार, नागरिक समाज और समुदाय मिलकर काम करते हैं तो बाल विवाह को रोका जा सकता है और अंततः पूरी तरह समाप्त भी किया जा सकता है। इस अवसर पर प्रोग्राम मैनेजर खुशी, वंदना, दीप नारायण के साथ 300 से ज्यादा किशोरियों एवं बालिकाओं की उपस्थिति रही।











