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Jaunpur News: किसानों का शोषण एवं बाजारी से बाज नहीं आ रहे उर्वरक विक्रेता

  • किसानों का शोषण एवं बाजारी से बाज नहीं आ रहे उर्वरक विक्रेता

  • हिन्दुस्तान मानवाधिकार संगठन ने जिलाधिकारी से की शिकायत

तेजस टूडे सं.
संजय शुक्ला
जौनपुर। हिन्दुस्तान मानवाधिकार संगठन का मानना है कि किसान केवल देश का अन्नदाता ही नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माता भी है। यदि किसान खुशहाल तो देश खुशहाल परन्तु आज जनपद में खरीद और रबी के सीजन में उर्वरक की मांग बढ़ते ही कुछ अधिकृत एवं सरकारी गोदामों द्वारा किसानों का खुलेआम शोषण किया जा रहा है जो अत्यंत निंदनीय है।

संगठन को लगातार किसानों से प्राप्त शिकायतों के अनुसार यूरिया, डीएपी आदि की कृत्रिम कमी दिखाकर कालाबाजारी की जा रही है। सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य से अधिक दाम वसूले जा रहे हैं। विवश होकर टैगिंग जैसी अनैतिक गतिविधियां किसानों को आर्थिक रूप से तोड़ रही है।

इस गंभीर विषय पर हिन्दुस्तान मानवाधिकार के महासचिव एवं मिशन रिमूव करप्शन के संचालक वकार हुसैन ने जिलाधिकारी को एक शिकायती पत्र भेजकर उक्त भ्रष्टाचार पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग किया है। उन्होंने लिखा है कि निर्धारित मूल्य 266.50 और सल्फरयुक्त यूरिया, रु.254 प्रति बोरी है परन्तु किसानी से अधिक लिया जा रहा है और इस की रसीद भी नहीं दी जा रही है। यूरिया और डीएपी के साथ अनावश्यक महंगे फालतू पैकेट्स जैसे नैनो यूरिया, जिंक, सल्फर आदि के छोटे पैकेट्स खरीदने के लिए किसानों को विवश करते हैं, अन्यथा कृत्रिम किल्लत दिखा कर खाद देने से इंकार कर दिया जाता है।

श्री हुसैन ने कहा कि यह कृत्रिम किल्लत कानून का खुला उल्लंघन तथा उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 का उल्लंघन है। उन्होंने पत्र में लिखा कि समस्त उर्वरक दुकानों, सहकारी गोदामों पर यूरिया, डीएपी आदि का सरकारी मूल्य सूची एवं तिथिवा स्टॉक स्पष्ट अक्षरों में सूची बोर्ड लगवाए जायं और सक्षम अधिकारियों द्वारा औचक निरीक्षण किया जाय, दोषियों पर तत्काल वैधानिक कार्यवाही की जाय।

 

 

 

 

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