मुंबई : भारतीय संगीत जगत में भक्ति गीतों की अपनी अलग ही महिमा है। समय-समय पर अनेक भजन भक्तों के हृदय में स्थान बनाते आए हैं, और अब इसी श्रृंखला में एक नया भजन “जय कैलाशा” भी जुड़ गया है। इस भजन को सुप्रसिद्ध भजनकार आचार्य हरिदास गुप्ता ने अपने भावपूर्ण शब्दों से सजाया है। इसे अपनी मधुर आवाज़ में स्वरबद्ध किया है दुष्यंत प्रताप सिंह और संजीवनी भेलांडे ने, जबकि इसका संगीत संयोजन भी दुष्यंत प्रताप सिंह ने किया है।
आध्यात्मिक अनुभूति का संगम
“जय कैलाशा” केवल एक भजन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव कराता है। जैसे ही श्रोता इस भजन को सुनता है, वह स्वतः ही महादेव शिव की उपासना में लीन हो जाता है। इस गीत के बोल और इसकी मधुर धुन श्रोताओं को कैलाश पर्वत और मानसरोवर की दिव्यता का अनुभव कराते हैं। आचार्य हरिदास गुप्ता द्वारा रचित इस भजन में भगवान शिव की अपार शक्ति, उनके दिव्य स्वरूप और कैलाश पर्वत की महिमा का सुंदर चित्रण किया गया है।
मनमोहक संगीत और स्वर का जादू
इस भजन की धुन अत्यंत भक्तिमय और मनमोहक है। दुष्यंत प्रताप सिंह और संजीवनी भेलांडे की मधुर आवाज़ इस भजन को और भी भावपूर्ण बना देती है। उनका स्वर संयोजन ऐसा है कि श्रोता सहज ही भक्ति की लहरों में बहने लगता है। इस भजन में प्रयुक्त संगीत शास्त्रीय और आधुनिक ध्वनियों का एक अनुपम संगम है, जो इसे और अधिक प्रभावशाली बनाता है।










