विकास की राह में अंधेरा
कल्याणपुर में एक महीने से पानी ठप, बिजली भी बेपटरी, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
तेजस टूडे मण्डल ब्यूरो
मुसैब अख्तर
बलरामपुर/गोण्डा। आज़ादी के 77 वर्ष बाद भी देश के कई गांव बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के देवीपाटन मंडल अंतर्गत तुलसीपुर क्षेत्र का ग्राम कल्याणपुर ऐसी ही बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है जहां विकास के दावे जमीनी हकीकत से कोसों दूर दिखाई देते हैं। गांव में पिछले एक महीने से पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक शिकायत करने पर संबंधित विभाग ने पाइपलाइन चोरी होने की बात कही लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इतने लंबे समय बाद भी न पाइपलाइन की मरम्मत की गई और न ही पानी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। इससे प्रशासनिक उदासीनता और लापरवाही साफ झलकती है। पानी की समस्या ने सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर डाला है। उन्हें रोजाना दूर-दराज़ इलाकों से पानी ढोना पड़ रहा है जिससे उनका समय और श्रम दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
वहीं स्वच्छ पेयजल के अभाव में जलजनित बीमारियों का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है जिससे ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। बिजली की भारी किल्लत ने गांव की महिलाओं की जिंदगी को अंधेरे में धकेल दिया है। हालात इतने खराब हैं कि रात होते ही घरों में अंधेरा छा जाता है और महिलाएं मोबाइल की टॉर्च जलाकर खाना बनाने को मजबूर हो जाती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार घंटों तक बिजली नहीं आती जिससे रोजमर्रा के काम भी प्रभावित होते हैं। खासकर महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है चूल्हा जलाने से लेकर बच्चों के लिए खाना तैयार करने तक, हर काम मोबाइल की हल्की रोशनी में करना पड़ता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद बिजली विभाग इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है, क्योंकि रात में पर्याप्त रोशनी नहीं मिल पाती। बिजली व्यवस्था की स्थिति भी बेहद खराब है। गांव में बिजली के खंभे और तार मौजूद होने के बावजूद आपूर्ति अनियमित है। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे दिन में महज 3–4 घंटे ही बिजली मिलती है, वह भी बिना किसी तय समय के। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है जबकि आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। महिलाएं रात के अंधेरे में मोबाइल की रोशनी के सहारे घरेलू काम करने को मजबूर हैं—जो ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे दावों पर सवाल खड़ा करता है। जब देश तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है, तब कल्याणपुर जैसे गांवों की यह तस्वीर विकास की असलियत उजागर करती है।
यह हालात न सिर्फ प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हैं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने की जरूरत भी बताते हैं। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस गंभीर समस्या का तत्काल समाधान किया जाए, पेयजल आपूर्ति बहाल की जाए और बिजली व्यवस्था को नियमित किया जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो उनका आक्रोश आंदोलन का रूप ले सकता है जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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