भदोखर थाने में न्याय के लिये आने वाले फरियादी बन रहे राणा के शिकार
क्षेत्र में चल रहे विभिन्न गोरखधंधों में अवैध वसूली का उठा रहा है जिम्मा
संदीप पाण्डेय
रायबरेली। “जब सैया भये कोतवाल को अब डर काहे का” उक्त लाइनें भदोखर थाने में 3 वर्षों से अधिक समय से तैनात एक हेड कांस्टेबल के ऊपर एकदम सटीक बैठती हैं। उल्लेखनीय है कि सलोन कोतवाली से 15 सितंबर को स्थानांतरित होकर भदोखर में तैनात हुए राणा सिंह के पैर विभागीय व्यवस्था के अनुरूप 3 वर्ष बीत जाने के बाद भी अभी यहीं जमे हुए हैं।
सूत्रों की मानें तो थाना क्षेत्र में होने वाले अवैध खनन, अवैध कटान और कच्ची शराब बनाने की अनुमति बाकायदा सुविधा शुल्क जमा करने के बाद इसी के इशारों पर ही मिलती है। यही नहीं, न्याय की आस लेकर थाने आने वाले फरियादियों के प्रार्थना पत्रों की सुनवाई तो साहब करते हैं लेकिन कार्यवाही राणा के हिसाब से की जाती है। इसी दबदबे की ओट में राणा सिंह बड़े साहब के नाम पर पीड़ितों से अवैध उगाही करते हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि बीते कुछ समय पूर्व थाने से महज कुछ सौ मीटर दूर शारदा नहर की पटरी के किनारे मृत गोवंशों के अवशेष प्रकरण में भी संलिप्त अपराधियों को इसी हेड कांस्टेबल का संरक्षण प्राप्त था। विवादित जमीनों पर कब्जा दिलाये जाने का बाकायदा ठेका लेने वाले इस भ्रष्ट हेड कांस्टेबल द्वारा प्रताड़ित किये जाने और अवैध वसूली के किस्से कई पीड़ितों की जुबान पर है।
नाम न छापने की शर्त पर इसके शोषण का शिकार कुछ फरियादियों ने बताया कि विपक्ष से मिलकर इसने कई विवादित जमीनों पर कब्जा दिलाने का भरकस प्रयास किया लेकिन मामला माननीय न्यायालय में लंबित होने के कारण मंसूबों में असफल हो गया। एक मामले में तो इसने विवादित जमीन पर कब्जा दिलाने के नाम पर पीड़ित से 20 हजार रुपये ऐंठ भी लिए लेकिन जब कब्जा नहीं दिला पाया तो काफी दबाव में लेने के बाद मजबूरन इसको रुपये वापस करना पड़ा। यह तो महज बानगी मात्र है। ऐसे दर्जनों मामले हैं जिसमें इसने खाकी के दामन को दागदार करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। अब देखना है कि थानेदार का कमाऊ पूत बने इस हेड कांस्टेबल के ऊपर कब उच्चाधिकारियों की नजर जाती है और इसका स्थानांतरण किया जाता है।
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