गौ सेवा से ही भक्ति की प्राप्ति एवं राष्ट्र कल्याण संम्भव: पाराशर जी

राजीव पाण्डेय
भभुआ (बिहार)। गौ सेवा से ही भक्ति की प्राप्ति और राष्ट्र कल्याण संम्भव हो सकता है। उक्त बातें स्थानीय प्रखंड क्षेत्र के जीगनी मे चल रहे श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के दूसरे दिन कथा वाचक रंजीत भाई पाराशर ने कथा वाचन के दौरान कही। उन्होंने भक्त श्रोताओं को भाव—विभोर कर देने वाली कथा सुनाई। साथ ही कहा कि संसार मे रहते हुए भी परमात्मा को पाया जा सकता है। शर्त यह है कि आपका शरीर तो संसार में रहे लेकिन आपमें संसार न प्रवेश कर जाए। उन्होंने अश्वत्थामा द्रौपदी प्रसंग की गाथा बहुत ही करुण भाव में सुनाई। उन्होंने कहा कि मनुष्य का सबसे बडा शत्रु अहंकार है जो जीव को पतन के मार्ग पर ले जाता है। इससे सबको बचना चाहिए। उन्होंने इसका उपाय बताते हुए कहा कि विनम्र बनकर रहना, ईश्वर में आस्था रखना, एक दूसरे जीव से प्रेम करने से ही अहंकार का नाश होता है। उन्होंने गौमाता के रक्षा पर भी लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि सनातन धर्म का आधार गौवंश ही है। इसके रक्षा के लिए शासन तंत्र को पूरा प्रयत्न करना चाहिए तभी भारत की संस्कृति बचेगी। इसके लिए लोगों को भी आगे आना होगा और हर व्यक्ति को कपिला गाय पालन होगा। कथा के दौरान कथा के मुख्य यजमान शिव वचन उपाध्याय सहित काफी संख्या में ग्रामीण व क्षेत्र के श्रद्धालु जन मौजूद रहे।
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