5 लाख आबादी वाला पासी समाज पार्टियों की सोशल इंजीनियरिंग से बाहर क्यों?

5 लाख आबादी वाला पासी समाज पार्टियों की सोशल इंजीनियरिंग से बाहर क्यों?

लोकसभा चुनाव में पार्टियों के प्रभारी भी नहीं समझ पाये इस समाज की ताकत
संदीप पाण्डेय
रायबरेली। राजा डालदेव, राजा बलदेव, राजा बछराज पासी, राजा अरक पासी, राजा नर पासी, राजा तिलक पासी, राजा माही पासी सहित वीरा पासी की शौर्य गाथा को बड़े-बड़े मंचों से बताया जाता है लेकिन जिले में पांच लाख आबादी वाले पासी समाज की लीडरशिप जीरो है।

अगर हम राजनीतिक पार्टियों की बात करें तो कांग्रेस के मंत्री शिवबालक पासी जिले में इस समुदाय का नेतृत्व करते थे लेकिन उनकी मृत्यु के बाद पासी समाज की लीडरशिप अब खास मायने नहीं रखती है, क्योंकि शायद राजनीतिक पार्टियों की सोशल इंजीनियरिंग में इस समुदाय को नजरअंदाज किया जाता रहा है। इतिहास के पन्नों में अपनी वीरगाथा को लेकर चर्चित इस समुदाय के लिए सोशल इंजीनियरिंग की सबसे बड़ी पाठशाला कहीं जाने वाली भारतीय जनता पार्टी ने भी उपेक्षा कर डाली है। लोकसभा चुनाव में इतनी बड़ी आबादी इस समुदाय के होने के बाद भी नेताओं ने मतदाताओं के रूप में इन्हें अपनी गिनती से बाहर रखा जबकि इस समुदाय के मतदान से किसी भी चुनाव के परिणाम को बदला जा सकता है। हो सकता है कि इस समुदाय की उपेक्षा ही कई बार सत्ताधारी दल के लिए हार का कारण बनी हो?

अगर हम विधानसभा के हिसाब से इस समुदाय की बात करें तो सलोन में 90000, ऊंचाहार में 70000, सरेनी में 50000, हरचंदपुर में 70000, बछरावां में 80000 और सदर में 80,000 के साथ एक बड़ी ताकत रखती है। सोशल इंजीनियरिंग की बात होती है तो राजनीतिक पार्टियां सिर्फ कुछ जातियों को लेकर चलने का प्रयास करती हैं और पासी समाज की उपेक्षा की जाती है। यहां तक कुछ पार्टियों के प्रभारी भी इस समुदाय की ताकत को समझ नहीं पाए और लोकसभा चुनाव में सारे संसाधन होने के बाद भी मुंह की खा गये।

सर पर आ चुके नगर पालिका और नगर पंचायत के चुनाव में भी इस समुदाय के मतदाता एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं जिन्हें संगठित करने के लिए राष्ट्रीय जस्टिस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंद्रपाल पासी और सुशील पासी जैसे नेता लगे हुए हैं और इन्हें साधने के लिए समाजवादी पार्टी सहित कांग्रेस पूरी तरह से लगी हुई है, क्योंकि इन दोनों पार्टियों ने इस समुदाय की ताकत और जनसंख्या का आकलन करते हुए चुनावी रणनीति बनाई है जबकि सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं है जिसे वह पासी समाज को संगठित करने के लिए आगे ला सकें।

राष्ट्रीय जस्टिस पार्टी के अध्यक्ष इंद्रपाल पासी का दावा है कि जिले में 600000 पासी बिरादरी के लोग चुनाव के परिणाम को बदलने में पर्याप्त भूमिका निभाते हैं और अच्छे अच्छे लोगों की गणित को फेल कर जाते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया है कि इस बार पासी समाज संगठित होकर अपना नेतृत्व चुनेगा।

आधुनिक तकनीक से करायें प्रचार, बिजनेस बढ़ाने पर करें विचार
हमारे न्यूज पोर्टल पर करायें सस्ते दर पर प्रचार प्रसार।

Jaunpur News: Two arrested with banned meat

Job: Correspondents are needed at these places of Jaunpur

बीएचयू के छात्र-छात्राओं से पुलिस की नोकझोंक, जानिए क्या है मामला