बैंक मैनेजर दुर्गेश श्रीवास्तव ने आत्महत्या तो किया, आखिर क्यों?
पत्नी एवं परिवार से परेशान नहीं थे तो क्या उच्चाधिकारियों से थे?
परिवार, बैंक, समाज में मृदुल व्यवहार रखने वाले ने ऐसा क्यों किया?
तेजस टूडे ब्यूरो
अजय पाण्डेय
जौनपुर। मैं डिप्रेशन में हूं। अगर तुम्हें बताऊंगा तो तुम भी परेशान हो जाओगी। उक्त बातें बीती रात चलती कार में गोली मारकर आत्महत्या करने वाले बैंक मैनेजर दुर्गेश श्रीवास्तव ने बैंक से घर जाते समय रास्ते में दूरभाष पर अपनी पत्नी से उस समय कही थी जब समय से घर न पहुंचने पर परेशान पत्नी उन्हें फोन करके लोकेशन ले रही थी। मौका—ए—वारदात से लेकर जिला अस्पताल सहित सम्बन्धित लोगों के बयान से यह तो स्पष्ट हो रहा कि बैंक मैनेजर ने आत्महत्या किया है लेकिन सवाल यहां यह उठता है कि आखिर उन्होंने आत्महत्या क्यों किया?
बता दें कि मृत दुर्गेश श्रीवास्तव जनपद के सुजानगंज क्षेत्र के सराय पड़री के यूनियन बैंक में बतौर प्रबन्धक के पद पर तैनात थे जो लखनऊ के गुडम्बा के रहने वाले थे। वे यहां नगर के लाइन बाजार थाना क्षेत्र के वन विहार के पास अपनी पत्नी रचना श्रीवास्तव के साथ रहते थे जो लगभग 30 किमी दूर अपने ब्रांच प्रतिदिन आते—जाते थे। पुलिस के अनुसार बीती रात बक्शा थाना क्षेत्र के प्रभु ढाबा के पास बैंक मैनेजर ने चलती कार में तमंचे से गोली मारकर आत्महत्या कर लिया। बुलेट पीठ को चीरते हुये सीट में जा धंसी। गोली लगने के बाद उनकी टाटा सिएरा कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गयी। यह देख राहगीर सहित आस—पास के लोग मौके पर पहुंचे और कार का शीशा तोड़कर उनको बाहर निकाले। मिली सूचना पर पहुंची पुलिस घायल बैंक मैनेजर को जिला अस्पताल ले गयी जहां उनकी मौत हो गयी।
वहीं ढाबे पर काम करने वाले लोगों ने बताया कि हम लोग काम कर रहे थे तभी एक कार हाईवे के डिवाइडर से टकरा गयी। हमें लगा कि दुर्घटना हुआ है जिस पर हम लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे और शीशा तोड़े तो कार में बैठा शख्स खून से लथपथ पड़ा था। उसे गोली लगी थी। शव के बगल में तमंचा पड़ा था। इसके बाद हम लोगों ने पुलिस को बताया जिस पर पहुंची पुलिस उन्हें जिला अस्पताल ले गयी जहां पता चला कि उनकी मौत हो गयी।
सुसाइड में ‘तंग आ चुके हैं’ लिखना कहीं कोई संकेत तो नहीं है?
पुलिस की मानें तो कार से सुसाइड नोट मिला है जिसमें लिखा है कि वह तंग आ चुके हैं, इसलिये जिन्दगी खत्म कर रहे हैं। खुदकुशी से परिवार का कोई लेना-देना नहीं है। वहीं पत्नी के लिये लिखा था कि ‘तुम अपना ख्याल रखना।’ ऐसे में यहां प्रश्न यह उठ रहा है कि यदि अपनी पत्नी से परेशान रहते तो उन्हें अपना ख्याल रखने की बात लिखते। परिवार से परेशान रहते तो यह भी नहीं लिखते कि उनकी आत्महत्या से किसी भी सदस्य से कोई लेना—देना नहीं है। सुसाइड में ‘तंग आ चुके हैं’ लिखा जाना कहीं विभागीय उच्चाधिकारियों की ओर कोई संकेत तो नहीं हैं? परिजनों, बैंक सहित ग्राहकों के अनुसार वह मिलनसार थे जो कुछ बीमारी से ग्रसित होने के बावजूद भी लोगों से मृदुल व्यवहार से मिलते थे और अपना कार्य नियमित एवं जिम्मेदारी से करते थे। ऐसे में उनका आत्महत्या किया जाना विभागीय समस्या समझ में आ रही है।
काफी दिनों से डिप्रेशन में थे, मगर परिवार से नहीं: रचना
पत्नी रचना श्रीवास्तव के अनुसार वह वह डिप्रेशन में थे लेकिन परिवार में किसी तरह का कोई विवाद नहीं था। न ही कभी कोई झगड़ा हुआ था। अलबत्ता वह शुगर एवं लिवर सिरोसिस की बीमारी से ग्रसित थे लेकिन इसके बावजूद भी वह परिवार एवं बैंक में अच्छे से कार्य करते थे। इधर वह काफी दिनों से डिप्रेशन में थे लेकिन कभी भी अपनी परेशानी परिवार से साझा नहीं किये थे। रोज की तरह गुरूवार की सुबह लगभग 9 बजे अपनी कार से बैंक रवाना हुये थे। लंच के समय मैंने फोन किया तो सब कुछ एकदम ठीक लग रहा था। उनकी बात से ऐसा नहीं लग रहा था कि वह आत्महत्या कर लेंगे। वह रोज शाम 6.30 बजे तक घर आ जाते थे। देर होने पर फोन करते थे लेकिन गुरूवार को कोई फोन नहीं आया तो मैंने फोन किया तो उन्होंने कहा कि मैं डिप्रेशन में हूं। अगर तुम्हें बताऊंगा तो तुम भी परेशान हो जाओगी। उनकी बात से लग रहा था कि उनके ऊपर विभागीय प्रेशर था जिसके चलते वह काफी दिनों से तनाव में चल रहे थे। फिलहाल घर आते तो बात खुलकर सामने आती लेकिन रास्ते में ही उन्होंने आत्महत्या कर लिया।
सबूत जुटाकर जांच कर रही फारेंसिक टीम: एएसपी
अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण आतिश सिंह ने बताया कि घटना की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। घायल मैनेजर को जिला अस्पताल ले गयी जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गयी। फॉरेंसिक टीम ने कार की जांच करके सबूत जुटा लिया है जिस पर आगे की कार्यवाही शुरू कर दी गयी है। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का इंतजार भी किया जा रहा है।
इस विषय पर बाद में बात करूंगा: रीजनल हेड
इस बाबत पूछे जाने पर यूनियन बैंक के रीजनल हेड संतोष कुमार ने बताया कि उस प्रकरण को लेकर हम लोग भी लगे हुये हैं। फिलहाल इस समय मैं बहुत व्यस्त हूं। इस विषय पर बाद में वार्ता करूंगा।
आत्महत्या का कारण तनाव ही होता है: डा. हरिनाथ यादव
इस संदर्भ में जनपद के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डा. हरिनाथ यादव का कहना है कि किसी भी आत्महत्या के पीछे का कारण तनाव ही होता है। आत्महत्या कोई शौक से नहीं करता है। फिलहाल आत्महत्या के दो प्रकार होते हैं जिनमें एक तो किसी बात पर तत्काल गहरा आघात होने पर कोई यह कदम उठाता है। दूसरा काफी दिनों से तनावग्रस्त चलने वाला व्यक्ति आत्महत्या करता है। कभी—कभी ऐसा भी होता है कि परिवार से कोई तनाव नहीं है लेकिन बाहर यानी कार्य करने वाले स्थान, विभागीय उच्चाधिकारी, दोस्त, रिश्तेदार आदि द्वारा किसी बात, दबाव आदि से ग्रसित होने वाला यह कदम उठाता है।










