सशक्त फाउण्डेशन ने चलती नाव पर की ‘पुरूषों पर अत्याचार के विरूद्ध परिचर्चा’
तेजस टूडे ब्यूरो
इं. आरके जायसवाल
लखनऊ। सशक्त फाउंडेशन द्वारा आयोजित “नवोन्मेष कुछ तो कहो” का सत्र 22 विषय “शादी का शहीद” पर एक महत्वपूर्ण परिचर्चा का आयोजन लखनऊ के गोमती नदी में चलती नाव पर किया गया। इस परिचर्चा में वक्ताओं ने अपने विचार साझा किये और वर्तमान में शादी-शुदा पुरुषों पर बढ़ते अत्याचार और उनके साथ हो रहे अन्याय के साथ न्याय प्रणाली, कानून, पुलिस, न्यायाधीश और समाज की भूमिका पर चर्चा की गई।
वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में अधिकांश संस्थाएं और कानून केवल महिलाओं के पक्ष में बात करते हैं जबकि पुरुषों के लिए किसी प्रकार की राहत नहीं है। पुरुषों को भी न्याय प्रणाली में समान अधिकार और सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए। परिचर्चा में उपस्थित वक्ताओं ने अपने अनुभव और ज्ञान को साझा करते हुए कहा कि पुरुषों के अधिकारों की अनदेखी करना न्याय प्रणाली के लिए उचित नहीं है। उन्होंने सरकार और समाज से आग्रह किया कि पुरुषों के अधिकारों की रक्षा के लिए भी कानून और न्याय प्रणाली में सुधार किया जाना चाहिए और साथ ही पुरुष आयोग का गठन जल्द से जल्द किया जाय। अगर पुरुष आयोग नहीं बनता है तो इस बात पर एकजुट होकर आंदोलन करने की बात की गई।
परिचर्चा में शामिल राष्ट्रीय मानवाधिकार एक्शन फोरम के अध्यक्ष व एडवोकेट शुभम् द्विवेदी एडवोकेट ने कहा कि सशक्त फाउंडेशन के इस आयोजन ने समाज में पुरुषों के अधिकारों और न्याय की बात करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास किया है। हमारे समाज में किसी भी गलत मानसिकता रखने वाले लोगों का समाज में कोई जगह नहीं है और क़ानून समाज में बराबर होनी चाहिए। साथ ही क़ानून का गलत इस्तेमाल कर फ़ायदा उठाने वाले लोगों के विरुद्ध कारगर साबित होंगे। हमें उम्मीद है कि इस प्रकार के आयोजनों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और न्याय प्रणाली में सुधार होगा।
इस अवसर पर मुख्य आयोजनकर्ता आशीष शुक्ला, शुभम् द्विवेदी एडवोकेट के अलावा वक्ता सौरभ मिश्रा, निहाल अवस्थी, अनुप्रिया सिंह, ऋचा प्रजापति, शबनम निशा, राशिद अत्तारी, पुष्पेन्द्र तन्मय, मोहित, सर्वेश, रजनीश, अभिषेक, देवेश, अमन, अमरेन्द्र सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।
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