एक दिन में लगाये गये 96 लाख से ज्यादा पौधे, गूंजा ‘एक पेड़ मां के नाम’ का संकल्प
गौ सेवा आयोग अध्यक्ष ने किया शुभारम्भ
तेजस टूडे ब्यूरो
एनके मिश्रा
लखीमपुर खीरी। जिले में पौधरोपण जन आंदोलन-2025 का आगाज हुआ। इस दौरान उप्र गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता की अगुवाई, नोडल अधिकारी मिनिस्ती एस की देख—रेख, डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल के निर्देशन में वन एवं वन्य जीव विभाग सहित अन्य राजकीय कार्यदायी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी ने तय लक्ष्य के सापेक्ष पौधों का रोपण शुरू किया। जिले में एक दिन में लक्ष्य 96 लाख 75 हजार 100 के सापेक्ष 96 लाख 89 हजार 100 पौधे रोपकर रिकॉर्ड बनाया गया।
तहसील सदर ब्लॉक बेहजम की ग्राम मरखापुर स्थित खीरी ब्रान्च नहर पटरी पर वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का गौ सेवा आयोग अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने शुभारंभ किया। इस दौरान अध्यक्ष ने विधायक सदर और एमएलसी के प्रतिनिधिगण, डीएम ने एसपी संकल्प शर्मा, डीएफओ संजय विश्वाल, एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह संग फलदार, छायादार, औषधीय पौध का रोपण किया। आचार्य अनूप मिश्रा ने वैदिक मंत्र पढ़कर पूरे विधि विधान से पौधों को विधिवत् पूजा अर्चना कर मंत्रोचारित किया। वेद मन्त्रों की गूंज रही ध्वनि के बीच आयोग अध्यक्ष ने पौध का रोपण किया। इस दौरान उन्होंने जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों ने ग्रामवासियों को सहजन का पौधा प्रदान किया।
इस दौरान गौ सेवा आयोग अध्यक्ष ने कहा कि लखीमपुर खीरी की पावन धरती और इसकी श्रेष्ठ वायु गुणवत्ता हम सबके लिए गर्व की बात है। सभी लोग एक नहीं, बल्कि दो पेड़ माँ के नाम लगाएं और उनकी देखभाल करें। उन्होंने गौवंश को धरती का श्रेष्ठ प्राणी बताया। डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने कहा कि वृक्षारोपण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि धरती से भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। गौ सेवा आयोग अध्यक्ष ने जिला पंचायत द्वारा संचालित अमृत सरोवर मोहम्मदाबाद और नकहा ब्लॉक के वृहद गौ आश्रय स्थल चाउपुर पहुंचा जहां उन्होंने फलदार, छायादार एवं औषधीय पौधों का रोपण किया। गो आश्रय स्थल में उन्होंने गोवंशों का पूजन कर हरा चारा और गुड़ भी खिलाया।
अभियान की नोडल अधिकारी व सचिव, वित्त मिनिस्ती एस ने बुधवार को सीडीओ अभिषेक कुमार, डीएफओ सौरीस सहाय, एसडीएम (सदर) अश्विनी सिंह संग पीलीभीत-बस्ती मार्ग स्थित बेढ़नापुर, सैदापुर भाऊ क्षेत्र में कुटी तालाब, ग्राम समाज की भूमि पर संचालित पौधरोपण स्थलों का निरीक्षण किया। इसके अलावा गत वर्ष खेतौशा में लगाए गए मियावाकी तकनीक से तैयार पौधों की स्थिति देखी।
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