बारिश की आशंका को लेकर कृषि विज्ञान केन्द्र अलर्ट
किसानों को फसल बचाने की सलाह
29 और 30 अक्टूबर को बारिश की संभावना

तेजस टूडे ब्यूरो
प्रमोद गोस्वामी
सन्त कबीर नगर। जनपद में आगामी दिनों में बारिश और गरज-चमक की संभावना को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, संत कबीर नगर ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 29 अक्टूबर को दोपहर बाद बारिश हो सकती है, जबकि 30 अक्टूबर को बारिश और तेज बौछारों की संभावना है। 31 अक्टूबर को भी कुछ स्थानों पर बारिश होने के आसार हैं। मौसम में बदलाव और तापमान में गिरावट से कृषि कार्य प्रभावित हो सकते हैं। इसे देखते हुए किसानों को कटी हुई फसल, अनाज और भूसे को सुरक्षित स्थान पर रखने तथा खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सीपीएन गौतम ने कहा कि किसान मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर कृषि कार्यों की योजना बनाएं। बारिश की आशंका को देखते हुए कटी फसल और अनाज को खुले में न छोड़ें। अनाज को तिरपाल से ढककर नमी से बचाएं और खेतों में जलभराव रोकने के लिए नालियों की सफाई सुनिश्चित करें।

बारिश से पहले छिड़काव करने से बचें
कृषि प्रसार वैज्ञानिक डॉ. अभिनव सिंह ने किसानों को सलाह दी कि बारिश की संभावना के दौरान कीटनाशकों, फफूंदनाशकों और पत्तियों पर छिड़के जाने वाले उर्वरकों का प्रयोग टालें। बारिश से इनकी प्रभावशीलता कम हो सकती है। मौसम सामान्य होने पर संबंधित उत्पाद के निर्देशों के अनुसार ही छिड़काव करें। उन्होंने किसानों से बारिश के बाद खेतों का निरीक्षण करने और फसल में रोग, कीट या जलभराव के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों से परामर्श लेने की अपील की।

गरज-चमक के दौरान खेतों में जाने से बचें
कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को सलाह दी है कि वे स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार धान सहित अन्य फसलों की कटाई और मड़ाई की योजना बनाएं। खेतों की जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त रखें तथा खुले में रखे अनाज और भूसे को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं। गरज-चमक के दौरान खेतों में काम करने और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। ऐसी स्थिति में किसी सुरक्षित भवन में शरण लें। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान दें और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार समय रहते जरूरी कदम उठाएं। उचित पूर्व तैयारी, सुरक्षित भंडारण और बेहतर फसल प्रबंधन से खराब मौसम के कारण होने वाले संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।







