Jaunpur News: लंका दहन के बाद रामादल में लौटे वीर हनुमान

  • लंका दहन के बाद रामादल में लौटे वीर हनुमान

  • विभीषण की शरणागति से लेकर मेघनाद वध एवं सुलोचना विलाप तक के मंचन ने दर्शकों को किया भाव—विभोर

तेजस टूडे सं.
बृजेश यादव
खुटहन, जौनपुर। स्थानीय क्षेत्र के कोकना (पिलकिछा) में धर्म मंडल रामलीला समिति की ओर से आयोजित रामलीला में लंका दहन के बाद वीर हनुमान की रामादल में वापसी, विभीषण की शरणागति एवं जलाभिषेक, अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति, मेघनाद वध और सुलोचना विलाप के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों के सजीव अभिनय, प्रभावशाली संवाद और रोमांचक दृश्यों ने उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
इस दौरान लंका दहन के बाद वीर हनुमान के श्रीराम के पास लौटने और माता सीता का संदेश सुनाने के प्रसंग ने श्रद्धालुओं में उत्साह भर दिया। इसके बाद रावण के द्वारा लात मार कर के भाई विभीषण को लंका से भगा देने के बाद उनके द्वारा अधर्म का मार्ग छोड़कर प्रभु श्रीराम की शरण ग्रहण करने का दृश्य प्रस्तुत किया गया। भगवान श्रीराम द्वारा विभीषण को अपनाने और उनका जलाभिषेक कर लंका का राजा घोषित करने के प्रसंग ने धर्म, मर्यादा और शरणागत की रक्षा का संदेश दिया।
इसके पश्चात अंगद-रावण संवाद का सशक्त मंचन हुआ। अंगद ने रावण को माता सीता को सम्मानपूर्वक लौटाकर युद्ध टालने की सलाह दी लेकिन अहंकार में डूबे रावण ने उनकी बात नहीं मानी। अंगद के निर्भीक संवाद और रावण के अहंकार से भरे प्रत्युत्तर ने रामलीला मंच को रोमांचित कर दिया। इस प्रसंग ने दर्शकों को संदेश दिया कि अहंकार और अन्याय का अंत निश्चित है। युद्ध के दृश्यों में मेघनाद द्वारा लक्ष्मण को शक्ति बाण मारने के प्रसंग ने वातावरण को भावुक कर दिया। लक्ष्मण को मूर्छित देखकर श्रीराम की व्याकुलता और रामादल में छाई चिंता का कलाकारों ने मार्मिक चित्रण किया। इसके बाद मेघनाद वध के दृश्य में धर्म की विजय और अधर्म के पतन का प्रभावशाली संदेश दिया गया।
मेघनाद की मृत्यु के बाद सुलोचना विलाप का दृश्य विशेष रूप से हृदयस्पर्शी रहा। पति की मृत्यु पर सुलोचना के करुण विलाप ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं। कलाकारों ने अपने अभिनय से रामायण के इन प्रसंगों की भावनात्मक गहराई को जीवंत कर दिया। पूरी रामलीला के दौरान दर्शक जय श्रीराम के जयघोष से वातावरण को भक्तिमय बनाते रहे। गौरतलब है कि कोकना (पिलकिछा) में धर्म मंडल रामलीला समिति द्वारा वर्ष 1948 से प्रतिवर्ष रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। विशिष्ट अतिथि डा. सूर्यभान यादव ने श्रीराम के अयोध्या से लेकर श्रीलंका तक के सफर के बारे में विस्तार से बताते हुए यह कहा कि भगवान श्रीराम के पदचिह्नों पर चलकर ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। अंत में समिति के पदाधिकारी ब्रजेश उपाध्याय, बजरंग बली उपाध्याय, धर्मेंद्र उपाध्याय, प्रवीण उपाध्याय, फिरतू चौधरी सहित समस्त कार्यकर्ताओं ने आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।