विश्व कल्याण के लिये विषपान करने वाले को महादेव कहते हैं: डा. मदन मोहन

तेजस टूडे सं.
डा. संजय यादव/बिपिन सैनी
बदलापुर, जौनपुर। भागवत के आह्वान करने से सब मंगलमय हो जाता है। उक्त बातें श्री रामजानकी मन्दिर लेदुका बाजार के प्रांगण में आयोजित श्री मद्भभागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ एवं रामकथा के दूसरे दिन वाराणसी से पधारे मानस कोविद डा मदन मोहन मिश्र ने कही।
उन्होंने आगे कहा कि जब प्रपंच का विस्मरण हो, भगवत स्मरण हो, महात्मा की शरण हो तो मरण मंगलमय हो जाता है। जो अपने को अमर बनाने के लिए अमृत पिया, वह केवल देव कहलाता है लेकिन जो लोक कल्याण के लिये हलाहल विष का पान करता है, वह देव नहीं, बल्कि महादेव कहलाता है। भागवत में स्वयं श्रीकृष्ण का वास है। उत्तरा के उदर में परीक्षित के प्राणों की रक्षा स्वयं श्री कृष्ण ने किया और सुकदेव को मां के उदर में दर्शन दिया।
उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित लोक कल्याण के लिये मृयमाण पुरुष के कर्तव्य सम्बन्धी प्रश्न पूछकर श्री मद्भभागवत महापुराण का निर्माण किया गया। जिसके आंख में भौतिकता सोना होता है, वही हृरणयाक्ष है। बुराई से अच्छाई की ओर इंगित करने की प्रक्रिया का नाम सत्संग है। इसी क्रम में वाराणसी से पधारीं मानस कोकिला डा. सुधा पाण्डेय ने नारद मोह प्रसंग की चर्चा करके लोगों को मंत्र—मुग्ध कर दिया। इस अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।







