आदिवासी समुदाय के ग्रामीणों ने पुनर्वास की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में किया प्रदर्शन
जयेश बादल
ललितपुर। इलाके में बने बांध में उस इलाके की कई गांवों की भूमि को डूब क्षेत्र की भूमि घोषित कर वहां के ग्रामीणों को मुआवजा देकर विस्थापित कर दिया गया था लेकिन उस इलाके में आदिवासी सहरिया समुदाय के ग्रामीणों को उनकी जमीन का अधिकरण कर उन्हें मुआवजा तो दिया गया लेकिन पुनर्वास नीति में सम्मिलित नहीं किया गया जबकि नियमानुसार उन्हें मौत के बाद भी पुनर्वास नीति में सम्मिलित किया जाना चाहिए था जिस कारण करीब इलाके के एक सैकड़ा से अधिक आदिवासी समुदाय के परिवार दरबदर हो रहे हैं। पुनर्वास नीति में सम्मिलित होने के लिए आदिवासी जनजाति के करीब 1 परिवारों ने कलेक्ट्रेट परिसर में धरना प्रदर्शन अनशन कर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पुनर्वास नीति में सम्मिलित किए जाने की मांग उठाई। इसके साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन को आगाह किया है कि यदि उनकी सुनवाई नहीं होती है तो वह आमरण अनशन के लिए बाध्य होंगे जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी इसके साथ ही उन्होंने थाना पुलिस और सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर भी जमीन खाली न करने के बाद में धमकी देने का आरोप लगाया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जनपद की तहसील महरौनी थाना बानपुर के अंतर्गत बनाए गए कचनोंदा बांध डूब क्षेत्र में आये ग्राम टिकरा तिवारी के ग्रामीणों को उस इलाके से विस्थापित किया गया था, जिसके एवज में ग्रामीणों को शासन से तयशुदा मुआवजा भी दिया गया था । इसके साथ ही शासन में पुनर्वास नीति योजना भी लागू की थी जिसके तहत ग्रामीणों को रहने के लिए एक स्थान सुनिश्चित किया गया था। लेकिन इस गांव के करीब एक सैकड़ा विस्थापित आदिवासी समुदाय के परिवारों को पुनर्वास नीति में सम्मिलित नहीं किया गया, जिस कारण अभी वह सभी आदिवासी सहरिया परिवार उसी इलाके के आसपास रह रहे हैं और खेती किसानी कर रहे हैं। क्योंकि बरसात का सीजन शुरू हो गया है इसलिए बांध भी निर्धारित सीमा तक भरा जाना है। जिस कारण सिंचाई विभाग के अधिकारी पुलिस लेकर आदिवासी परिवारों तक पहुंचे और उन्हें धमकी देकर वहां से हटने के लिए कहा गया।
जिससे आक्रोशित होकर एक सैकड़ा परिवार जिला मुख्यालय पर डीएम कार्यालय पर पहुंचे, जहां पर उन्होंने डीएम कार्यालय का घेराव कर शासन प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी के नाम ज्ञापन देकर पुनर्वास नीति में सम्मिलित करने की मांग उठाई है। आरोप है कि वर्ष 2008 से वर्ष 2013 तक पुराने अधिग्रहण अधिनियम 1984 के तहत 2014 नए अधिनियम के तहत ना तो कोई शासन की पुनर्वास एवं पुनरीक्षण नीति के तहत कोई लाभ प्रदान किया गया है। इसके साथ ही हम सभी गरीब आदिवासी किसानों को उनके मकान के बदले कोई लाभ प्रदान किया गया है। इतना ही नहीं 9 जुलाई 2020 को सिंचाई विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा आवासीय मकान झोपड़ियों को हटाने बाबत धमकियां दी गई जो उनके साथ घोर अन्याय और गैरकानूनी कृत्य है। आदिवासी सहरिया समुदाय का आरोप है कि सिंचाई विभाग द्वारा गलत रिपोर्ट लगाकर उनके हकों को मारना चाहते हैं। इसके साथ ही उन्होंने शासन प्रशासन को आगाह किया है कि यदि उनकी सुनवाई नहीं होती है तो वह बृहद रूप से धरना प्रदर्शन अनशन करेंगे जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।
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