पति ने प्रेमी संग करायी पत्नी की शादी
मायारूपी नारी से मुक्त होकर शुरू किया नया जीवन
तेजस टूडे सं.
डा. प्रदीप दूबे
सुइथाकला, जौनपुर। राम चरितमानस की ये पंक्तियां “विधिहुँ न नारि हृदय गति जानी। सकल कपट अघ अवगुन खानी”।। समय समय पर समाज में चरितार्थ होती दिखती है, इसी तरह का वाकया स्थानीय क्षेत्र का सरायमोहिउद्दीनपुर गांव में देखने को मिला जब पति स्वयं अपनी पत्नी का सिन्दूरदान प्रेमी संग कराया और नम आंखो से उसे विदा किया। शास्त्र सम्मत है कि नारी चरित्र समुद्र को मापने के समान होता है।
बताया जाता है कि लगभग दो साल पहले सराय मोहिउद्दीनपुर क्षेत्र स्थित एक गांव निवासी युवक की शादी खेतासराय थाना क्षेत्र की युवती के साथ बड़े ही धूमधाम से हुई थी। शादी होने के बाद युवती पति संग ससुराल चली आई लेकिन विवाहिता के दिल में पति की जगह प्रेमी ने अपना स्थान बना लिया था। शादी होने के बाद भी विवाहिता प्रेमी के प्रेमजाल में बंधी रही और जब वह ससुराल से लौटकर मायके गई तो प्रेमी के साथ फरार हो गई। मायके वाले किसी तरह उसे खोजकर घर वापस लाये और पति को बुलाकर उसके साथ विदा कर दिया। ससुराल आने के बाद भी वह प्रेमी के प्रेमजाल में हीं फंसी रही।
पति को जब पत्नी की कारगुजारी का पता चला तो वह उसे अपने साथ लेकर नोएडा चला गया जिससे वह प्रेमी के प्रेमजाल से मुक्त हो जाय। समय बीतने के साथ हीं पत्नी के आचरण में कोई परिवर्तन नहीं हुआ और जब पति ड्यूटी पर चला जाता तो वह घण्टों अपने प्रेमी से बात करती रहती। पति जब पत्नी के कृत्य से लाचार हो गया तो वह उसे लेकर घर आया और प्रेमी को सरायमोहिउद्दीनपुर स्थित देवी मन्दिर पर बुलाया और अपनी मौजूदगी में ही मन्दिर में प्रेमी से पत्नी की मांग में सिन्दूर भरवाया और नम आंखों से उसे विदा कर मायारूपी नारि से मुक्त हुआ और नये जीवन की शुरुआत की।
इस घटना से जहां सामाजिक मर्यादा और रिश्ते तार-तार हुये, वहीं 7 जन्मों तक साथ निभाने का कसम खाने खाने वाली पत्नी का काला चेहरा भी उजागर हुआ है।
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