मधुमक्खी पालन कर बेरोजगार कर सकते हैं इनकम: डा. आरपी

देवी प्रसाद शर्मा
आजमगढ़। विश्व मधुमक्खी दिवस हर वर्ष 20 मई को मनाया जाता है। इसके आयोजन का अभिप्राय हमारे जीवन में मधुमक्खी एवं अन्य परागकर्ताओं की भूमिका एवं महत्व को आम जनमानस तक पहुँचाना है। पूरे विश्व में उगने वाले पौधों में लगभग 75-80 प्रतिशत में फल या बीज बनने के लिए परागकर्ताओं की आवश्यकता पड़ती है जिसमें मधुमक्खियों की भूमिका अहम हो जाती है। मधुमक्खियों से प्रत्यक्ष रूप से हमें मधु, मोम, पराग, रॉयल जेली, मौन विष, मौन गोंद आदि तो प्राप्त होता ही है। साथ ही एक अच्छे परागकर्ता के रूप में फसलों में प्रति इकाई क्षेत्रफल में उपज एवं गुणवत्ता में वृद्धि कर किसान की आमदनी में बढ़ोत्तरी करता है। वैश्विक स्तर पर मधुमक्खी की विशिष्टताओं के दृष्टिगत संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 मई को एक विशेष दिन घोषित किया जिसमें मधुमक्खियों का मनुष्य के जीवन तथा पारिस्थितिक तंत्र संतुलन में योगदान के बारे में चर्चा की जाती है।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र कोटवा आजमगढ़ के वरिष्ठ पौध सुरक्षा वैज्ञानिक एवं मधुमक्खी पालन विशेषज्ञ डॉ रुद्र प्रताप सिंह ने विश्व मधुमक्खी दिवस पर विकास खण्ड पल्हनी ग्राम हाफिजपुर में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। आज बेरोजगारी का दौर चल रहा है। ऐसे में मधुमक्खी पालन कर जीवित अधिक से अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं। मधुमक्खी पालन से बेरोजगार हाथों को रोजगार मिलेगा और उसका सेवन करने से स्वास्थ्य ठीक भी रहता है। मधुमक्खी के लाभ व महत्व के बारे में विस्तार से चर्चा की गई। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ रणधीर नायक व डॉ विजय विमल ने भी मधुमक्खी पालन के विभिन्न पहलूओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में जय भारत नर्सरी के अनिल श्रीवास्तव, अजय सिंह, जितेंद्र विश्वकर्मा सहित कुल 28 लोगों ने प्रतिभाग किया।
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