प्रधानाध्यापक ने माफीनामा लिखवाकर मामले को किया शान्त
मास्टर साहब बना रहे थे मास्टरनी जी का वीडियो
तेजस टूडे ब्यूरो
राजेश चौबे
बक्सर (बिहार)। गुरू को भगवान से भी बडा दर्जा दिया गया है, लेकिन जब गुरूजी ही मर्यादा को तार तार कर रहे हो तो विद्यार्थी की अनुशासनात्मक डोर कटने की प्रबल संभावना हो जाती है। बिहार सरकार चाहे कितना भी सरकारी स्कूलों मे पढाई होने का ढिंढोरा पीट ले, लेकिन सच्चाई तो कुछ और ही है।
नई बहाली कर सरकार सभी विद्यालयों मे शिक्षकों की कमी को लगभग पूरा की है लेकिन नियुक्त शिक्षकों मे से अधिकांश पढाना नही चाहते है। कुछ नेतागिरी कर रहे है और कुछ पढाना चाहते है लेकिन व्यवस्था के भेट चढ रहे हैं। सरकारी विद्यालय केवल परीक्षा लेने और डिग्री देने के मशीन बन चुके है। वहां विद्यार्थियों को पढाया नही जाता है बल्कि केवल हर माह उनकी परीक्षा ली जाती है। परीक्षा भी ऐसी की केवल विद्यार्थी को शामिल होना है। नाम और पता भरकर चले जाना है। मास्टर साहब कॉपी भी नही जांचते है। हां, विभाग को काॅपी का मूल्यांकन किये बिना ही रिजल्ट भेज देने की परंपरा को मिटने नही देना चाहते है। जिस परीक्षा मे कापियों का मूल्यांकन ही न किया जाता हो, वैसी परीक्षा लेने का भला औचित्य क्या है। बता दें कि तेजस टूडे को एक विद्यालय में झगड़ रहे शिक्षकों की वीडियो और एक पत्र हाथ लगा है, जिसको देखने के बाद आप कहने वाले है कि इक्कीसवीं सदी के गुरूजी लोग हैं कमाल के। बताया जा रहा है की यह विडियो बक्सर जिला अंतर्गत नावानगर प्रखंड के सोनवर्षा स्थित हाईस्कूल का है। विडियो देखने से साफ जाहिर हो रहा है की शिक्षक विद्यार्थियों को पढाना नही चाहते है। गुटबंदी से स्पष्ट होता है की यहां हर रोज शिक्षक आपस मे लडते है। प्राप्त पत्र मे एक शिक्षक के द्वारा माफी मांगते हुए कबूल किया गया है की एक शिक्षक विशेष के कहने पर महिला शिक्षकों का विडियो बना रहे थे। मास्टर साहब ही विडियो विडियो खेल रहे है तो छात्र को भला कौन रोकेगा। इस विषय मे सोनवर्षा हाईस्कूल के प्रभारी प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार सिंह ने उक्त मामलों की पुष्टि करते हुए बताया कि वह विडियो बनाने वाले शिक्षक से माफीनामा लिखवा चुके हैं। विडियो में झगड़ रहे शिक्षकों के सवाल पर प्रधानाध्यापक ने फोन काट दिया।
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