जायसवाल महासभा केन्द्र की सत्ता में भागीदारी के लिये ऐतिहासिक निर्णय लेगीः ध्रुवचन्द जायसवाल
लखनऊ। अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ध्रुवचन्द जायसवाल ने कहा कि बीते 27 जून को स्वजाती बन्धुओं से महत्वपूर्ण अपील किया गया था कि 31 जुलाई तक अपने सुझावों से महासभा को अवगत करा दें जिससे महासभा आप लोगों के दिये सुझावों पर निर्णय ले सके। सुझाव मांगते समय इस बात का उल्लेख किया गया था कि भाजपा ने 2014 एवं 2019 के लोकसभा चुनावों में जायसवाल समाज के किसी भी व्यक्ति को टिकट में नहीं दिया था। 2024 में भी उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित कई वरिष्ठ नेताओं से राज्यसभा एवं विधान परिषद में प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्रदान करने की अनेकों बार निवेदन किया गया। श्री जायसवाल ने कहा कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने धैर्यपूर्वक समझा था कि हम क्यों राज्यसभा एवं विधान परिषद में प्रतिनिधित्व करने का अवसर मांग रहे हैं। उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण सुझावों पर अमल करते हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल में तीन नए स्वजातीय को टिकट दिया था जिसमें दो चुनाव जीत गये। एक चुनाव इसलिए हार गये, क्यांेकि आजमगढ से एक भी सीट भाजपा नहीं जीत सकी थी, इसलिए वह सीट हार गये। महासभा ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के प्रति आभार व्यक्त किया था। उन्होंने कहा कि महासभा क्यों राज्यसभा एवं विधान परिषद में प्रतिनिधित्व करने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से एवं उत्तर प्रदेश के महासचिव संगठन से मांग करता रहा।
जब मिलकर अपनी मांगों को तर्क संगत समझाना चाहता था तो मिलने का समय नहीं दिया था। इसका महासभा को शिकवां-शिकायत नहीं है। अब दूसरे रणनीति के तहत समाधान निकालने का प्रयास करना होगा। एक बात से उन समर्थक स्वजाती बन्धुओं को अवगत कराना है कि भाजपा को सपने में भी मतदान नहीं किया होगा। ऐसे समाज के कई लोगों को राज्यसभा एवं विधान परिषद में अपने समाज का प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिया है। हमारा समाज तो भाजपा को मतदान करने के लिए बदनाम है, इसलिए अन्य पार्टियां टिकट देने से कतराती हैं, फिर भी भाजपा ने आज तक राज्यसभा एवं विधान परिषद में जायसवाल समाज को प्रतिनिधित्व करने का अवसर नहीं दिया है। अन्त में श्री जायसवाल ने कहा कि महासभा के चुनाव समन्वय समिति के सदस्य के साथ सुझावों का अवलोकन किया जा रहा है। शीघ्र ही केन्द्र की सत्ता मे भागीदारी हेतु महासभा ऐतिहासिक निर्णय लेगी।