भाजपा सांसद अपने क्षेत्रों से वैश्यों को टिकट दिलायें, अन्यथा विरोध होगा: ध्रुवचन्द जायसवाल

  • भाजपा सांसद अपने क्षेत्रों से वैश्यों को टिकट दिलायें, अन्यथा विरोध होगा: ध्रुवचन्द जायसवाल

तेजस टूडे ब्यूरो
अजय जायसवाल
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के 80 लोकसभा सीट मे 17 वैश्य बाहुल्य सीटें हैं। 403 विधानसभा सीट मे 90 वैश्य बाहुल्य है। 5 लोकसभा की ऐसी सीटें हैं जहाँ दो-दो विधानसभा की गोरखपुर एवं महराजगंज की सीटें हैं। अधिकांश सीटें पूर्वांचल में है। जहाँ पिछड़े वैश्यों की संख्या सर्वांधिक है, पश्चिमी यूपी में सवर्ण वैश्यों की संख्या सर्वांधिक है। पूर्वांचल के संसदीय सीट गोरखपुर, महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, डुमरियागंज, बलरामपुर, वाराणसी, चंदौली, प्रयागराज सहित एक दर्जन सीटें हैं। बाकी सीटें पश्चिमी यूपी के कानपुर, गाजियाबाद, सहारनपुर, मेरठ, आगरा सहित अन्य सीटें है। वैश्य बाहुल्य पर भाजपा के वर्तमान सांसदों को अवगत कराते हुए कहना है कि आपके संसदीय सीटों के अंतर्गत 5 विधानसभा सीटें हैं, उसमें से एक विधानसभा सीट पर वैश्य को अनिवार्य रूप से भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व एवं यूपी नेतृत्व से अपने अपने स्तर से टिकट दिलाए आपके हित में होगा। अगर टिकट दिलाने में असमर्थ रहे तो 2029 के लोकसभा चुनाव में आपके विरुद्ध वैश्य प्रत्याशी चुनाव लडेंगे जो सांसद वैश्य बाहुल्य सीट पर वैश्य प्रत्याशी को टिकट दिलाने में सफल होंगे। उन्हें पूर्ण विश्वास दिलाना चाहता हूं। आपके लिए लोकसभा चुनावों मे तन-मन -धन के साथ वैश्य समाज एवं महासभा भी हर स्तर से समर्थन करने के लिए तैयार रहेगा।

उक्त बातें अखिल भारतीय कलवार कलाल कलार जायसवाल महासभा के राष्ट्रीय महासचिव ध्रुवचन्द जायसवाल ने पत्र—प्रतिनिधियों से हुई वार्ता के दौरान कही।

श्री जायसवाल ने स्मरण कराते हुए कहा कि यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री स्व० चन्द्रभान गुप्ता के कार्यकाल के समय में जो वैश्य विधायक की संख्या थी, कई विधानसभाओं के चुनावों में लगातार वैश्य विधायक की संख्या घट रही थी किन्तु 2022 के विधानसभा मे कुछ संख्या बढी थी। इसकी मुख्य वजह स्वतंत्रदेव सिंह थे। 2021 मे महासभा के पदाधिकारियों से वार्ता के दौरान वादा किया था कि इस बार आप लोगों की संख्या बढ़ेगी पहले के ब्यान में विस्तार से वर्णन है। 2014 लोकसभा चुनाव से 2024 तक कई राज्यों में एक भी टिकट नहीं मिला है, इसलिये युवाओं एवं महिलाओं में अपना हक लेने हेतु राजनैतिक जागरुकता आई है तथा तेज गति से बढ़ रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे/रही है। बडी संख्या में अपने दलों से टिकट भी मांग रहे/रही है। कुछ युवाओं मे इतना जबरदस्त उत्साह है कि चुनाव लड़ने के लिए अपने प्रचार प्रसार में जुट गये हैं। युवाओं मे साहस, जज्बा, उमंग दिखाई दे रहा है। वैश्य समाज राजनैतिक रुप से पहचान बनाने में कामयाब होगा।