भागवत, भक्ति और ज्ञान वैराग्य की त्रिवेणी है: सरगम शास्त्री
तेजस टूडे सं.
श्यामधनी यादव एडवोकेट
पराऊगंज, जौनपुर। स्थानीय क्षेत्र के छातीडीह गांव में स्थित ‘सुमेर उपवन’ रामसुमेर मिश्र के आवास पर श्रीमद्भागवत कथा में सरगम शास्त्री ने देवर्षि नारद वेदव्यास के मिलन की चर्चा करते हुए कहा कि भागवत भक्ति ज्ञान वैराग्य की त्रिवेणी है जिसके अविरल प्रवाह मे प्राणी मात्र के कल्याण की कामना निहित है।
भागवत कथा गणित विषय की तरह है। भागवत क्या है और क्यों करना चाहिए, इसको बताते हुए कहा कि भागवत शोक मोह भय का अपहरण करता है। एकादशी व्रत निष्ट राजा अम्बरीश और महर्षि दुर्वासा की चर्चा करते हुए आपने कहा कि पूर्वाग्रह से किया गया कार्य सार्थक नहीं होता है। पूज्यनीय दुर्वाषा को भक्त अम्बरीश के समक्ष नतमस्तक होना पड़ा ब्रह्म आदि देवों ने उनकी सहायता नहीं की।
उन्होंने बताया कि नारद जी की सलाह पर महर्षि दुर्वासा भक्त अम्बरीश की शरण में गए और अम्बरीश ने महर्षि दुर्वासा को हृदय से लगा लिया एवं उनका चरण धोकर चरणामृत लिया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को रेखांकित करते हुए आपने कहा कि अहंकार व घमण्ड विनाश का सबसे बड़ा कारण है। कंस जैसा मामा को अहंकार के मद में चूर होना उनके लिए भारी पड़ गया। उनका सम्पूर्ण विनाश का कारण उनके ही भांजे भगवान श्री कृष्ण बन गए। भारतीय संस्कृति एवं मर्यादा की उपादेयता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति से हमें दया, दान, धर्म जैसी चीजें मिलती हैं जो किसी दूसरी संस्कृति में संभव नहीं है।
इस अवसर पर श्रीभूषण मिश्र, सपा नेता रत्नाकर चौबे, कृपाशंकर दुबे, संतोष मिश्र, दशरथ मिश्र, पत्रकार कृष्ण कुमार मिश्र, प्रमोद मिश्र, रवि प्रकाश मिश्र, अरुण मिश्र, पप्पू पाण्डेय, राघवेंद्र मिश्र, कमलेश मिश्र, बृजवासी देवी, वन्दना, रोहनी, मोहनी, मुस्कान, दमयंती, उर्मिला पाण्डेय सहित तमाम लोग उपस्थित रहे। आरती वंदन सभी श्रद्धालु जनों ने किया।
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