3 अप्रैल से 10 जून तक का समय था। अभी तक नदी में 40% ही काम हो पाया। टेंडर के नियमों के विरुद्ध अधिकारियों ने ठेकेदार से काम करवाया। बड़े डेंजर मशीन लगाकर होना था नदी में चैनेइजेशन का कार्य। एक डेंजर और छोटे मडपम्प, पोकलेन और ट्रैक्टरों से कराया गया नियम विरुद्ध कार्य। जनप्रतिनिधियों की लापरवाही से अधिकारी और ठेकेदार ने की है करोड़ों के सरकारी धन की बंदरबाट। 2021 से जिले में जमे धर्मेंद्र सिंह की एक और परियोजना फेल होने के कगार पर है। इलाके के किसानों, व्यापारियों और नागरिकों को रोजी-रोटी का बड़ा संकट बना हुआ है।








