जितने भी शिकायतकर्ता आ रहे थे, सभी की प्रार्थना पत्र राजस्व अभिलेखागार से लेकर राजस्व निरीक्षक, लेखपाल चेक करके जिलाधिकारी के पास जाने दे रहे थे। यदि उनसे संबंधित शिकायत होती थी तो जिलाधिकारी तक नहीं जाने दे रहे थे। इसका उदाहरण बरईपार की शिकायतकर्ता रुचि मिश्रा हैं। जब उनको पंजीकरण स्थल से ही शिकायत करने से वापस किया गया तो एक अधिवक्ता की सहायता लेनी पड़ी तब जिलाधिकारी तक पहुंच पाई। इसी प्रकार कई दर्जनों शिकायतकर्ताओं को निराश होना पड़ा। जिलाधिकारी के समाधान दिवस पर अधिक शिकायतकर्ता न आयें जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण तहसील में देखने को मिला। जब शुक्रवार को पत्रकारों ने तहसीलदार रवि रंजन कश्यप से जिलाधिकारी के आने की 2 अगस्त को आने की सूचना मांगी तो उन्होंने बताया कि 16 अगस्त के समाधान दिवस पर जिलाधिकारी उपस्थित रहेंगे। वहीं जिलाधिकारी के शनिवार को उपस्थित होने पर पत्रकारों एवं अधिवक्ताओं ने फिर पूछा तो तहसीलदार ने सीधे कहा कि मैं सूचना देने के लिए थोड़े बैठाया गया हूं। तहसीलदार की कार्यप्रणाली से पत्रकारों एवं अधिवक्ताओं में आक्रोश है। तहसीलदार की कार्यप्रणाली तहसील समाधान दिवस पर चर्चा का विषय बनी रही।









