बदलाव के 40 साल की कहानी
स्टडी हल एजुकेशनल फाउण्डेशन ने मनाया 40 साल
शिक्षा, रचनात्मकता और बदलाव का जश्न
तेजस टूडे ब्यूरो
आरएल पाण्डेय
लखनऊ। स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन (SHEF) के 40 साल पूरे होने पर स्टडी हॉल परिसर में ‘टेपेस्ट्री ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन’ नाम से एक खास प्रदर्शनी का आयोजन हुआ। इस प्रदर्शनी में फाउंडेशन के स्कूलों और विभिन्न कार्यक्रमों के काम, उपलब्धियों और बदलाव की कहानियों को दिखाया गया। 4 नवंबर को आयोजित प्रदर्शनी में भारत और विदेश से आए मेहमानों के साथ छात्र-छात्राएं, शिक्षक, अभिभावक और पूर्व विद्यार्थी शामिल हुए। प्रदर्शनी के जरिए लोगों को पिछले 40 सालों में SHEF के शिक्षा के क्षेत्र में किए गए काम को करीब से देखने और समझने का मौका मिला। फाउंडेशन के हर स्कूल और कार्यक्रम ने अपने काम को अलग-अलग तरीकों से पेश किया। कहीं बच्चों के प्रोजेक्ट्स और मॉडल थे तो कहीं पढ़ाने के नए तरीके, इंटरैक्टिव गतिविधियां और बच्चों के अनुभव। इन सभी के जरिए यह दिखाया गया कि शिक्षा सिर्फ किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को सोचने, सवाल करने, अपनी बात रखने और अपने आसपास की दुनिया को समझने का मौका भी देती है।
प्रदर्शनी में स्टडी हॉल स्कूल, प्रेरणा गर्ल्स स्कूल, विद्यास्थली और फाउंडेशन के दूसरे कार्यक्रमों के काम को दिखाया गया। इसमें लड़कियों की शिक्षा, समुदाय के साथ मिलकर काम करने, शिक्षकों को प्रशिक्षण देने और वंचित समुदायों के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने की कोशिशों को भी जगह दी गई। इस प्रदर्शनी की एक खास बात यह रही कि बच्चों और शिक्षकों ने खुद अपने काम को मेहमानों के सामने प्रस्तुत किया। बच्चों ने अपने प्रोजेक्ट्स के बारे में बताया कि उनके पीछे की सोच समझाई और अपने सीखने के अनुभव साझा किए। इससे यह भी देखने को मिला कि जब बच्चों को अपनी बात रखने और खुद सीखने के मौके मिलते हैं तो वे कितने आत्मविश्वास के साथ अपनी बात कह सकते हैं।
फाउंडेशन की एक और खास पहल, ‘टीचर ऑफ द ईयर’ प्रतियोगिता के विजेता शिक्षकों के वीडियो भी प्रदर्शित किए गए। इन वीडियो के माध्यम से शिक्षकों के समर्पण, उनकी मेहनत और कक्षा में किए जा रहे नए प्रयोगों को सामने लाया गया। यह उन शिक्षकों के योगदान को सम्मान देने का एक प्रयास था जो अपने काम से बच्चों के सीखने के अनुभव को बेहतर बना रहे हैं। यह प्रदर्शनी पुराने और नए साथियों को एक साथ आने का मौका भी बनी। लोगों ने फाउंडेशन की पुरानी उपलब्धियों को याद किया, नई पहलों के बारे में जाना और पिछले चार दशकों में आए बदलावों को देखा। इन सभी प्रयासों के पीछे शिक्षा में समानता, सामाजिक न्याय और हर बच्चे के बेहतर भविष्य का विचार हमेशा से जुड़ा रहा है। 1986 में डॉ. उर्वशी साहनी ने सिर्फ छह बच्चों के साथ स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन की शुरुआत की थी। आज 4 दशक बाद यह संस्था 50 लाख से अधिक बच्चों तक पहुंच चुकी है और एक लाख से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षित कर चुकी है।
‘टेपेस्ट्री ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन’ सिर्फ उपलब्धियों को दिखाने वाली प्रदर्शनी नहीं थी, बल्कि उन बच्चों, शिक्षकों, अभिभावकों और समुदायों की कहानियों का उत्सव थी जिन्होंने इस सफर को खास बनाया है। यह इस बात का भी संदेश था कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब बच्चे सवाल कर सकें, अपनी सोच विकसित कर सकें, रचनात्मक बनें और अपने आसपास की दुनिया में बदलाव लाने की ताकत हासिल करें।
स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन के बारे में
स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन (SHEF) की स्थापना 1986 में डॉ. उर्वशी साहनी ने लखनऊ में की थी। यह एक गैर-लाभकारी संस्था है जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय के लिए काम करती है। अपने स्कूलों, सामुदायिक शिक्षा कार्यक्रमों और शिक्षक प्रशिक्षण पहलों के माध्यम से संस्था अब तक 50 लाख से अधिक बच्चों और एक लाख से अधिक शिक्षकों तक पहुंच चुकी है।











