आपातकाल के जरिये सरकार ने पार की थी तानाशाही की पराकाष्ठा: रामप्रकाश
शिवमंगल अग्रहरि
चित्रकूट। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस सरकार द्वारा देश में थोपे गये लोकतंत्र की हत्या के षडयंत्र आपातकाल दिवस 25 जून को लोकतन्त्र सेनानी सम्मान समारोह कार्यक्रम सर्किट हाउस सभागार में आयोजित किए। कार्यक्रम का शुभारम्भ भाजपा के पितृ पुरूष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी व पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्रों पर पुष्पार्चन कर किया गया।
साथ ही लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह व संगोष्ठी के बाद कार्यकर्ताओं ने काली पट्टी बांधकर सर्किट हाउस से पटेल चौराहे तक मौन जुलूस निकाला। पूर्व मंत्री चन्द्रिका प्रसाद उपाध्याय ने कहा कि आपातकाल लोकतंत्र की हत्या है। कौंग्रेस ने लोकतंत्र की हत्या करके लोकतंत्र को बंधुआ बनाने की बदनीयत से आपातकाल लगाया था। कौंग्रेस ने 90 से अधिक बार चुनी हुई सरकारों को अलोकतांत्रिक तरीकों से बर्खास्त किया है। कौंग्रेस ने आपातकाल लगाकर लोकतंत्र की हत्या का षडयंत्र रचा है। लोकतंत्र सेनानी राम प्रकाश द्विवेदी ने कहा कि वो आपातकाल के विरोध में जब सक्रिय थे, तो वह नवयुवक थे। कौंग्रेस के उत्पीडन, प्रताडना को झेलकर, मीसा कानून के तहत जेल में बंद रहकर लोकतंत्र की रक्षा के लिए अनेको लोगों ने संकल्पित प्रयास किए। लोकतंत्र सेनानी ननकू राम राजपूत ने कहा कि आपातकाल में कौंग्रेस और इंदिरा गांधी व गांधी परिवार के खिलाफ कुछ भी बोलना अपराध था। आपातकाल में सरकार ने प्रेस पर पाबंदी लगा दी थी। लोकतंत्र रक्षक रामपाल त्रिपाठी ने कहा कि इंदिरा गांधी ने अपने अवैध निर्वाचन के निरस्त होने के कारण देश को आपातकाल के अंधेरे में झोक दिया था। लोकतंत्र सेनानी भागीरथी ने कहा कि वह सदा गलत के विरोध में खडे रहे हैं। जिलाध्यक्ष लवकुश चतुर्वेदी ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए कौंग्रेस के विरोध में पूरा देश खडा हो गया था। पूर्व जिलाध्यक्ष चन्द्र प्रकाश खरे ने कहा कि काैंग्रेस कभी भी लोकतंत्र में विश्वास नही करती है। दिनेश तिवारी ने कहा कि सब कार्यकर्ताओ को जन जन को जागरूक करना होगा। जिला महामंत्री आलोक पाण्डेय ने कहा कि काैंग्रेस ने लोकतंत्र की हमेशा हत्या की है। कौंग्रेस ने लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यवस्था को नष्ट करके परिवार तंत्र स्थापित करने षडयंत्र रचा था। आपातकाल देश के लोकतंत्र का काला अध्याय है। इस मौके पर जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष पंकज अग्रवाल, विपुल सिंह, ब्रजेश पाण्डेय, पंकज अग्रवाल, महेन्द्र कोटार्य, रामबाबू गुप्ता, तीरथ तिवारी, अखिलेश रैकवार, प्रेमलाल बाल्मीकी, अनूप, राघव, श्रद्धांशु, सच्चिदानंद गर्ग, श्रवण पटेल, सुनील गर्ग, पवन बद्री, राम प्रताप, श्रवण, भगवानदीन, शिव प्रकाश खगार, भागवत त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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