संविधान की चेतना और बहुजनों की आवाज बने नीरज भाई पटेल
तेजस टूडे ब्यूरो
रविन्द्र चौधरी
उरई (जालौन)। कुछ लोग भीड़ में जन्म लेते हैं और कुछ ऐसे होते हैं जो भीड़ को दिशा देते हैं, रास्ता दिखाते हैं, उन्हीं विरलों में से एक नीरज भाई पटेल हैं। वह न सत्ता से डरे, न तंत्र के सामने झुके और न ही किसी लालच या भय के आगे मौन हुए। जब संविधान के अनुच्छेद खोखले किए जा रहे थे, जब लोकतंत्र को लाठी और बंदूक से दबाया जा रहा था। तब एक नाम, एक आवाज़ सामने आई। नीरज भाई पटेल जो बोलते नहीं, गरजते हैं।
उनकी कलम कोई समाचार मात्र नहीं, बल्कि वह संवैधानिक हक़ की धार है।जो अन्याय पर चोट करती है और पीड़ितों के लिए न्याय का रास्ता खोलती है।
वे केवल पत्रकार नहीं हैं, वह संविधान की चलती-फिरती प्रस्तावना हैं, वह जनतंत्र की जीवंत मिसाल हैं और हाशिए पर खड़े लोगों के लिए उम्मीद की आखिरी किरण हैं। जब हम जैसे लोगों को यह यकीन नहीं था कि इस देश में कोई हमारी सुनता भी है तब नीरज भाई ने हम जैसे लाखों युवाओं को संविधान का मार्ग दिखाया।
उन्होंने हमें सिखाया कि न्याय भीख नहीं, अधिकार है और अधिकार लड़कर नहीं, बल्कि समझकर लिया जाता है। आज जब सत्ता की ताकत लोगों को तोड़ रही है तब नीरज भाई जैसे लोग हमें जोड़ रहे हैं। संविधान, आत्मसम्मान और संघर्ष की उस धारा से जिसने इस देश को गणराज्य बनाया। उनकी एक रिपोर्ट, एक पोस्ट, एक स्टैंड, वह सत्ता की नींव हिला देता है, क्योंकि उनके पास कलम के साथ संविधान की धार और जनसमर्थन का बल है। उनका संघर्ष व्यक्तिगत नहीं, संवैधानिक है, न्यायिक है, सामाजिक है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि— यदि इरादे लोकतांत्रिक हों और पथ संविधान का हो, तो एक अकेला भी जनक्रांति का स्वर बन सकता है। नीरज भाई पटेल हमारे लिए सिर्फ नाम नहीं, बल्कि एक आंदोलन हैं, एक सिद्धांत हैं, एक प्रेरणा हैं। उन पर गर्व करना केवल भाव नहीं, संविधान और सामाजिक न्याय के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
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