धूमधाम से मनायी गयी महर्षि वाल्मीकि जयन्ती
बीबी सिंह
मंगरौरा, प्रतापगढ़। वाल्मीकि जयंती अश्विन मास की शरद पूर्णिमा को मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है इस तिथि को लोग उत्साहित होकर बाल्मिकी जयंती मनाते हैं ऐसी मान्यता है कि महर्षि वाल्मीकि के बचपन का नाम रत्नाकर था इनका पालन पोषण भील समुदाय में होने के कारण ये जंगल में लूटपाट का कार्य करते थे जो भी राहगीर जंगल से होकर जाता था उसे लूट लेते थे और अपने परिवार का खर्च चलाते थे पौराणिक कथाओं के अनुसार एक दिन देवर्षि नारद मुनि जंगल से होकर जा रहे थे तभी रत्नाकर ने मुनि को लूटने के लिए रोका लेकिन मुनि के अनुनय विनय पर भी रत्नाकर ने कहा कि नही जो भी तुम्हारे पास है उसको दे दो अन्यथा तुम्हे नुकसान उठाना पड़ेगा तभी नारद मुनि ने कहा कि तुम जो लूटपाट करके अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हो क्या वे सब आपके बुरे कार्यों में साथ देंगे तभी रत्नाकर ने मुनि को पेड़ से बांधकर अपने परिवार के लोगों से पूछने के लिए गए सभी लोगों से पूछा कि क्या सभी लोग मेरे द्वारा किए जा रहे बुरे कार्यों का जो फल मिलेगा उसमें सभी बंटवारा करेंगे तो परिवार के सभी सदस्यों ने इनकार कर दिया तब रत्नाकर जंगल में वापस आकर देवर्षि नारद मुनि के पैरों पर गिर पड़े और अपनी मुक्ति का तरीका पूछने लगे तो देवर्षि नारद मुनि ने उन्हें राम राम जपने के लिए कहा लेकिन इनके मुख से राम राम के बजाय मरा मरा निकल रहा था बहुत समय तक तपस्या करने के बाद इन्हें साक्षात भगवान का दर्शन हुआ और ईश्वर की प्रेरणा से ही इन्होंने महाकाव्य रामायण की रचना की तभी से महर्षि वाल्मीकि नाम से प्रसिद्ध हुए इनके द्वारा रचित रामायण में 24000श्लोक हैं जो हिंदुओं का पवित्र ग्रंथ है तभी से महर्षि वाल्मीकि जयंती बड़े हर्षोल्लास से मनाई जाती है हम सभी को महर्षि वाल्मीकि के द्वारा दिए गए उपदेशों पर चलने का संकल्प लेना चाहिए और समाज में उत्पन्न भेदभाव को मिटाकर अच्छे पथ पर चलने का संकल्प लेना चाहिए पूरे देश प्रदेश के साथ साथ ग्रामीणांचल क्षेत्र में भी महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई गई।

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