साधना खरवार बनीं महिलाओं के लिये मिशाल मशरूम उत्पादन में बनी नम्बर एक ट्रेनर

विकास यादव
बक्शा, जौनपुर। आत्मनिर्भर भारत और नारी सशक्तिकरण की एक मिसाल स्थानीय विकास खंड की नरी ग्रामसभा की साधना खरवार पत्नी जितेंद्र खरवार ने पेश की है। उनकी मेहनत आज रंग लाई है। साधना जन कल्याण आजीविका स्वयं सहायता समूह चलाती हैं जो उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ा हुआ है।
इस बाबत पूछे जाने पर साधना ने बताया कि उन्होंने इस व्यवसाय की शुरुआत मात्र 1000 रुपये से की थी। आज वे सीजन में 18 से 20 क्विंटल तक मशरूम का उत्पादन कर रही हैं। सीज़नल कमाती है 150000 से 200000 लाख इनके यहां 5 प्रकार के मशरूम उगाए जाते हैं- ऑयस्टर, बटन, मिल्की, प्रोटोविला और ऑयस्टर किंग।
मशरूम उगाने की विधि बताते हुए उन्होंने कहा कि भूसे को 12 से 14 घंटे पानी में भिगोया जाता है, फिर सुबह निकालकर रख दिया जाता है। जब 70% नमी खत्म होकर 30% नमी रह जाती है, तब उसे प्लास्टिक में भरकर बीज मिलाकर 20 से 25 दिन तक रखा जाता है जिसके बाद मशरूम तैयार हो जाता है।
आज स्थिति यह है कि जौनपुर जनपद के 21 ब्लॉकों से लोग उनके घर पर मशरूम की खेती की ट्रेनिंग लेने आते हैं जिन्हें वे निःशुल्क प्रशिक्षित करती हैं, ताकि उनकी भी आजीविका चल सके। आज की ट्रेनिंग में विशाल चौहान, विकास सिंह, अमित सिंह, आशीष सिंह, इब्राहिम सिद्दीकी, सुमित प्रजापति, अनिल निषाद, विनय मौर्य, अभिषेक प्रजापति, अरुण यादव समेत कई लोग मौजूद रहे।
साधना ने बताया कि पूर्व डीएम मनीष वर्मा एवं सीडीओ अनुपम शुक्ला ने उनके यहां आकर मशरूम की खेती में प्रथम आने पर उन्हें सम्मानित किया था। साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र बक्सा द्वारा 7000 रुपये का पुरस्कार भी दिया गया था। वर्तमान में उनके यहां उत्पादित मशरूम सरकारी विद्यालयों के मिड-डे मील में भी जाता है।
उन्होंने बताया कि इस कार्य की प्रेरणा उन्हें उनके पिता डॉ. दयाराम (वैज्ञानिक, राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय समस्तीपुर बिहार) और डॉ. सुरेश कनौजिया (कृषि वैज्ञानिक बक्सा) से मिली। वहीं पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने भी उन्हें आर्थिक मदद करके प्रोत्साहित किया।







