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बेंदा खदान में नहीं थम रहा अवैध खनन!

  • बेंदा खदान में नहीं थम रहा अवैध खनन!

  • ओवरलोडिंग से बिगड़ रही सड़कों की हालत

  • जिम्मेदारों पर लग रहे खनन माफियाओं से सांठ-गांठ के आरोप

तेजस टूडे ब्यूरो
रूपा गोयल
बांदा। जनपद के खनन के जिम्मेदार अधिकारियों की संरक्षण में बेंदा खदान में अवैध खनन और ओवरलोडिंग थमने का नाम नहीं ले रहा है। निर्धारित पट्टा आवंटन क्षेत्र से बाहर नदी की जल धारा में अवैध खनन करना खदान संचालक के लिए आम बात हो चुका है। लगातार सोशल मीडिया और समाचार पत्रों के समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियेां के कांनों में जूं तक नहीं रेंग रही है।
सूत्रों की मानें तो खदान संचालक को खनिज विभाग के जिम्मेदार और प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों को पूरी तरह से संरक्षण प्राप्त होने से बेंदा खदान अवैध खनन और ओवरलोडिंग का हॉट स्पॉट बनकर रह गयी है। बेंदा खदान में दिन के उजाले से लेकर राते के अंधेरे तक रोजाना सैकड़ों ओवरलोड बालू भरे ट्रकों से नदी से निकाली गयी गीली बालू का परिवहन लगातार बढ़ता ही जा रहा है।
जनपद के तिंदवारी थाना क्षेत्र के अन्तर्गत संचालित होने वाली बेंदा खदान एक बार फिर से चर्चा का विषय बनी हुई है। नदी की जल धारा में अवैध खनन से लेकर ओवरलोड वाहनों का खेल एक बार फिर से इस खदान में शुरू हो चुका है। यही यह कहा जाय कि बेंदा खदान में अवैध खनन और ओवरलोडिंग का जिन्न प्रकट हो गया है तो काई अतिश्योक्ति नहीं होगी। खदान के अवैध अवैध खनन की कवरेज करने की टीम के कैमरों में कैद हुई तस्वीरों से साफ तौर पर देखा जा सकता है कि खदान संचाल को प्रशासन के किसी भी आदेश का भय नहीं है तभी तो ओवरलोड गाड़ियों को लोड कर बालू के अवैध खनन का पहलवानी दाव—पेंच एक बार फिर से शुरू हो चुका है।
बताते चलें कि जनपद में लगातार हो रहे अवैध खनन बांदावासियों के लिए अभिशाप बन चुका है। लगातार हो रहे अवैध खनन से जहां नदी की जलधारा प्रभावित हो रही है, वहीं जनपद के तापमान और पर्यावरण संतुलन में भी काफी असर देखने को मिला है। गर्मी के दिनों केा बांदा जनपद का तापमान पूरे विश्व में रिकार्ड स्तर पर पर पहुंच चुका है। पर्यावरणविद और वैज्ञानिकों ने इसके लिए जनपद में अवैध खनन को पूरी तरह से जिम्मेदार माना था लेकिन वर्षाकाल समाप्त होने के बाद एक बार फिर से खनन माफियाओं के हौंसले पहले की तरह ही बुलंद हो चुक हैं। इस बार शुरू होेते ही बेंदा खदान के संचालक और उसके गुर्गों ने अपना खेल दिखाना शुरू कर दिया है। जहां अवैध खनन में मशीनों से चलने से इलाकाई कांप रहे हैं, वहीं अवैध खनन से प्राप्त बालू को ओवरलोड वाहनों से स्थानीय सड़के कराह रही हैं। बेंदा खदान शुरू होते ही एनजीटी के निर्देश सहित सरकारी फरमान पूरी तरह से धराशाही होते नजर आ रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो खदान से जुड़े लोगों का कहना है कि हमारा खेल पूरी तरह से सेट हैं। हमारी खदान में किसी भी जिम्मेदार अधिकारी की निगाह नहीं पड़ेगी। हमने सभी को सेट कर रखा है। अब देखना यह है कि इस खदान के अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर आखिर कब लगाम लगती है या फिर बेंदा खदान पूर्व की भांति पहलवानी दांवपेच का अखाड़ा ही बनी रहती हैं?

 

 

 

 

 

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