जैपुरिया स्कूल्स बनारस पड़ाव कैम्पस का वार्षिकोत्सव सृजन—2024 सम्पन्न

जैपुरिया स्कूल्स बनारस पड़ाव कैम्पस का वार्षिकोत्सव सृजन—2024 सम्पन्न

सांस्कृतिक नृत्य नाटिका में स्वामी विवेकानन्द की गौरव गाथा का हुआ भव्य मंचन
कलाएं शिक्षा का एक अनिवार्य तत्व हैं: निर्मला श्रीवास्तव
तेजस टूडे ब्यूरो
दीपक कुमार
चन्दौली। सेठ एम.आर. जैपुरिया स्कूल्स बनारस के पड़ाव कैम्पस द्वारा आयोजित वार्षिकोत्सव सृजन 2024 रंगारंग कार्यक्रमों के साथ सफतापूर्वक सम्पन्न हुआ। स्वामी विवेकानन्द जी की गौरव गाथा पर आयोजित कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद के विचारों एवं भारतीय संस्कृति व वेदांत दर्शन को विश्व पटल तक पहुँचने के महान योगदान का मंचन किया गया।
कार्यक्रम में गणमान्य अतिथियों ने मंत्रोच्चारण के बीच तुलसी वेदी पर दीप प्रज्जवलित करके कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात लोक गायिका उर्मिला श्रीवास्तव मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित रहीं। इस पुनीत अवसर पर जीवन में विशिष्ट उपलब्धियों के लिए मानद अतिथियों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि उर्मिला श्रीवास्तव ने कहा कि कलाएं शिक्षा का एक अनिवार्य तत्व है। जैसे पढ़ना, लिखना और अंकगणित, संगीत, नृत्य, चित्रकला और रंगमंच वे सभी कुंजियां हैं जो गहन मानवीय समझ और उपलब्धि को खोलती हैं। हर बच्चे में कोई न कोई प्रतिभा छिपी होती है। हर बच्चा किसी न किसी क्षेत्र में चैम्पियन हो सकता है। यह स्कूल और अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों के अन्दर के चैम्पियन को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करे। खेल हो या जीवन, कोई भी व्यक्ति कभी हारता नहीं है, वह या जीतता है या सीखता है। असफलता एक चुनौती है, हमें इसे स्वीकार करके जरुरी सुधार करते रहना चाहिए। जब तक की हम सफल नहीं हो जाते।
अध्यक्षीय उद्बोधन में जैपुरिया स्कूल्स बनारस के चेयरमैन दीपक बजाज ने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागिता करने से बच्चों की प्रतिभा निखरती है और जैपुरिया स्कूल बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सदैव तत्पर है। प्रबंध निदेशक मनोज बजाज ने कहा कि भारत भूमि देवभूमि व महान धरा है जहां प्रत्येक युग में महामानव किसी न किसी रूप में अवतरित होते रहे हैं। महान विचारक, महान संत, अवतार, वैज्ञानिक, गणितज्ञ, भौतिक, रसायन शास्त्र, अर्थ शास्त्र, वास्तु शास्त्र आदि के विशेषज्ञ आदि अनेक रूपों में समय-समय पर मानव का पथप्रदर्शन करने हेतु भारत की धरा पर जन्म लेते रहते हैं। ऐसे ही महान युग पुरुष विवेकानंद जी थे जो आज भी हमारा मार्गदर्शन करते हैं। साथ ही अधिशासी निदेशक श्याम सुंदर बजाज ने विचार व्यक्त किया तो पड़ाव कैम्पस के प्रधानाचार्य आशीष सक्सेना ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित उर्मिला श्रीवास्तव, विद्यालय के अध्यक्ष दीपक बजाज, उपाध्यक्ष संजय अग्रवाल, प्रबंध निदेशक मनोज बजाज, कार्यकारी निदेशक श्याम सुंदर बजाज, निदेशक अनिल जाजोदिया, अनिल सिंह, सिद्धांत सचिदेवा, गौरव अग्रवाल, आयुष्मान बजाज, गौरांग बजाज, जैपुरिया ग्रुप स्कूल्स के ऑपरेशन उपाध्यक्ष शिव पाण्डेय, बाबतपुर प्रधानाचार्या सुधा सिंह, प्रधानाचार्य आशीष सक्सेना, समस्त शिक्षक, अभिभावकगण एवं बच्चों की उपस्थिति रही। संपूर्ण पटकथा एवं नृत्य गीत का प्रशिक्षण विद्यालय के शिक्षकवृंद ने दिया। समस्त मंच संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन स्कूल के बच्चे तनुश्री बजाज, समृद्धि सिंह, रिद्धिमा सिंह यादव, भाव्या, शफ़क़ रिज़वी एवं मुहमद अब्बास ने संयुक्त रूप से किया। इस आशय की जानकारी प्रशासनिक अधिकारी सेठ एम.आर. जैपुरिया स्कूल्स बनारस पड़ाव कैम्पस ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी है।

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कई लोगों को दिया गया मुख्य सम्मान
वार्षिकोत्सव पर वर्षपर्यन्त उल्लेखनीय योगदान के लिए विशिष्ट शिक्षकों, छात्र–छात्राओं व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी पुरस्कृत किया गया। मुख्य रूप से कक्षा दसवीं बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को, सी.बी.एस.ई क्लस्टर एवं नेशनल खेल प्रतिस्पर्धा में अद्भुत प्रदर्शन कर नेशनल में फस्ट रनअप अंडर फोर्टीन गर्ल्स टीम एवं एथलेटिक में सेकेण्ड रनअप देवांश प्रताप सिंह आदि को सम्मानित किया गया। वहीं शिक्षकों में बेस्ट टीचर के रूप में मिडिल विंग से लता पाण्डेय एवं सीनियर विंग से शिवांगी सोनी को सम्मानित किया गया। आर्डेन्ट रीडर अवार्ड द्वारा तबस्सुम कहकशां व कंज्युरर अवार्ड द्वारा अभिषेक बसाक को सम्मानित किया गया। एडमिन स्टाफ में पर्फेक्ट एज़क्यूटर अवार्ड राकेश शर्मा, पर्फेक्ट टास्क मास्टर अवार्ड मंगल पाण्डेय, मोस्ट डेलीजेंट अवार्ड प्रिन्स राय एवं शत—प्रतिशत उपस्थिति का सम्मान कृष्णमोहन जी को मिला। इसी क्रम में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में ड्राइवर, कंडक्टर एवं चपरासी को भी उनके द्वारा किये गए सराहनीय कार्य हेतु सम्मानित किया गया।

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सांस्कृतिक कार्यक्रमों की जबर्दस्त प्रस्तुति
कार्यक्रम का प्रारंभ शिव स्तुति के साथ किया गया। तत्पश्चात सूत्रधार ने भारत के महान दार्शनिक, संयासी और एक महान वक्ता स्वामी विवेकानन्द के अभूतपूर्व योगदान के इतिहास के बारे में विस्तार से बताया और फिर बच्चों ने विवेकानन्द जी के बचपन से आरंभ करके जीवन के प्रत्येक चरण जैसे उनकी शिक्षा–दीक्षा, रामकृष्ण परमहंस द्वारा दीक्षा प्राप्त होना, स्वामी विवेकानंद आध्यात्मिक यात्रा, विवेकानंद जी का संसार को आध्यात्म ज्ञान से अवगत कराना, शिकागो यात्रा के दौरान इस युवा संन्यासी द्वारा युवाओं के हृदय को अपने उद्द्बोधन द्वारा झंकृत करना एवं जीवन के अंतिम पड़ाव बेलूर मठ तक के दृश्यों को एक सूत्र में पिरोकर मंचित किया गया। साथ ही सभी दृश्यों को आपस में जोड़ते हुए काली माँ स्तुति नृत्य, मेरे दिल में रहती है भोली भाली मेरी माँ, है पिता जब तेरा, विवेकानंद शात्रीय नृत्य कल्चरल नृत्य एवं मोटिवेशनल समूह नृत्य और संगीत से सुसज्जित कर सम्पूर्ण नृत्यनाटिका का अद्भुत मंचन किया गया।

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बच्चों की सुन्दर प्रस्तुति से उपस्थित लोग भाव—विभोर
कार्यक्रम में 1500 से अधिक बच्चों, अभिभावकों एवं अतिथियों ने बड़े उत्साह से भाग लिया। सम्पूर्ण परिसर को सुन्दर ढंग से सुसज्जित किया गया। विशाल मंच पर अपने बच्चों को सुंदर प्रस्तुति देते हुए देखकर अभिभावक भाव—विभोर हो गये।

 

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