गोकुल बाबा की पूजा से मनोकामना होती है पूरी
सावन माह में भक्तों की लगती है अपार भीड़
तेजस टूडे ब्यूरो
अश्वनी सैनी
उन्नाव। शहर के मगरवारा स्थित प्रसिद्ध गोकुल बाबा मंदिर शिव भक्तों की आस्था का केंद्र है। यहां बाबा के उपासकों का रोजाना आवागमन बना रहता है।
कार्तिक माह में बाबा के अधूरे विवाहोत्सव पर लगने वाले मेले और शिव आराधना के पावन माह सावन में यहां भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है। भक्तों में ऐसा विश्वास है कि यहां के स्वयम्भू शिवलिंग की अच्छे मन से पूजा अर्चना करने वाले कि हर मनोकामना पूरी होती है। अति प्राचीन इस शिव मंदिर व शिवलिंग को लेकर तमाम जनश्रुतियां विख्यात है। एक जनश्रुति के अनुसार जहां यह विशाल मंदिर विद्यमान है। वहां घना जंगल हुआ करता था। इस जंगल मे चरवाहे मवेशियों को चराने ले जाते थे। एक चरवाहे ने देखा कि उसकी एक गाय एक स्थान पर जाकर खड़ी हो जाती और उसके थनों से दूध टपकने लगता है। यह क्रम जब कई दिनों तक चलता रहा तो उसने उस स्थान पर पड़ी पत्तियां आदि हटाया तो वहां उसे शिवलिंग नजर आया। चरवाहे से ये बात गांव पहुँची तो शिवलिंग को खड़ा कर निकलने के उपक्रम शुरू हुए। काफी गहराई तक खुदाई के बाद जब कोई छोर नहीं मिला तो गांव के शिव भक्त गोकुल सिंह ने उसी स्थान पर चबूतरा बनवाने का निश्चय किया। जब चबूतरे का निर्माण शुरू हुआ तो शिवलिंग का आकार बढ़ने लगा।
बताते हैं मंदिर निर्माण के बढ़ते खर्च से परेशान गोकुल सिंह को स्वप्न में भगवान भोले नाथ ने स्वप्न में दर्शन दिए और उन्हें एक रहस्यमय कलश की जानकारी दी। साथ ही कहा कि मंदिर निर्माण के लिए जरूरत भर का धन प्रति दिन निर्मल भाव से उसी घड़े से निकाल ले। यदि इस कलश में किसी ने लालच है हाथ डाला तो कलश विलुप्त हो गाएगा। सुबह गोकुल को स्वप्न में बताए स्थान पर कलश मिला और मंदिर निर्माण होने लगा। कहते हैं गोकुल ने घर मे किसी महिला के बार बार पूछने पर कलश का राज बता दिया। उस महिला ने जब कलश धन निकलने के हाथ डाला तो वह विलुप्त हो गया। बाद में मंदिर का शेष निमार्ण जन सहयोग से हुआ।एक कहावत यह भी प्रचलित है कि मंदिर देर रात तक बैठे रहने के बाद जब गोकुल सिंह घर लौटते थे। स्वयं बाबा उन्हें गांव तक छोड़ने आते थे। बाबा ने उनसे कह रखा था कि पीछे मुड़ कर कभी मत देखना। बाबा पीछे आते हैं। इस बात की तस्दीक के लिए उन्होंने ने एक दिन पीछे मुड़ कर देख लिया उस दिन से उनकी गर्दन टेढ़ी हो गयी जो मरते दम तक रही।
गोकुल बाबा के एक और बड़े भक्त में गांव के रामनाथ सिंह का भी नाम है। बताते हैं कि उनकी बाबा में इस कदर लगन लगी कि वह हर वक्त यही रट लगाए रहते थे “भोले भुलेव न”। दिन रात कोई भी वक्त हो वह सब कुछ भूलकर मंदिर का रुख कर देते थे। ऐसे ही एक बार दर्शन को निकले तो फिर कभी लौट के नहीं आए। वह कहां गये, इस बात का आज भी कोई पता नहीं चल सका। उनके पुत्र संजय सिंह ने बताया कि लापता पिता को खोजने कोई भी कोशिश नहीं छोड़ी गई लेकिन उनका आजतक कोई पता नहीं चल सका। ऐसी ही अनेकानेक जन श्रुतियाँ क्षेत्र वासियो में विख्यात हैं जो बाबा के प्रति लोगों की आस्था को और प्रगाढ़ करती हैं। बाबा के उपासक जिले भर में ही नहीं, बल्कि पड़ोसी जनपदों के लेकर गैर प्रांतों में भी है जो मौका मिलते ही यहां खिंचे चले आते हैं।
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