आए दिन गौशालाओं से मिल रही नकारात्मक खबरें किसानों के विश्वास को कमजोर कर रही हैं। ऐसे में सरकार को 2027 से पहले ही इस मुद्दे पर कोई ठोस नीति बनानी चाहिए जिससे किसानों को राहत मिले और सरकार की उपलब्धियों में यह एक सफल मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। इसके साथ ही चित्रकूट की मंदाकिनी नदी की अविरलता और निर्मलता का मुद्दा भी उठाते हुए अर्चन नितिन उपाध्याय ने कहा कि नदी सफाई के नाम पर केवल दिखावा किया जा रहा है, जबकि नालों का गंदा पानी आज भी मंदाकिनी में गिर रहा है। श्रद्धालु इस गंदे पानी में स्नान और आचमन करने को मजबूर हैं, जिससे मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। जय बजरंग सेना के संरक्षक मदन गोपाल महराज ने वास्तविक विकास से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए प्रशासन को सचेत किया कि केवल कागजी योजनाओं से जनता संतुष्ट नहीं होगी, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्यवाही की आवश्यकता है। अपील की कि गौवंश संरक्षण और मंदाकिनी नदी की सफाई के लिए ठोस कदम उठाएं, ताकि किसानों और श्रद्धालुओं को राहत मिल सके और क्षेत्र का वास्तविक विकास संभव हो सके।





