जिला प्रशासन के नोटिस के बाद सपा कार्यालय से हटायी गयी मुलायम की प्रतिमा
अमित त्रिवेदी
हरदोई। जनपद में समाजवादी पार्टी के संस्थापक एवं पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी कार्यालय पर लगाई गई प्रतिमा को रातों-रात हटा दिया गया। मुलायम सिंह यादव की यह प्रतिमा नगर पालिका कैंपस में स्थित सपा कार्यालय पर लगाई गई थी जिसके लिए चबूतरा बनाया गया था। सपा नेता का दावा है कि मूर्ति के अनावरण के लिए सपा मुखिया अखिलेश यादव को बुलाया जाना था। मुलायम सिंह यादव की सपा कार्यालय पर प्रतिमा स्थापित होने की जानकारी जैसे ही प्रशासन को हुई तो नगर पालिका ने कार्यालय का तीन शेड हटाने, दुकानों का अनुबंध खत्म करने और बगैर अनुमति लगाई गई प्रतिमा को हटाने के लिए समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष को नोटिस थमा दिया। हालांकि इसको लेकर सपा कार्यकर्ताओं ने रोष भी जताया लेकिन अंततः सपा नेताओं को खुद ही कार्यालय से सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा हटानी पड़ी।रातों -रात हटाई गई मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा को उखड़वाकर सपा कार्यालय में रखवा दिया गया है। नगर पालिका ने सपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह यादव को जारी किए गए नोटिस में कहा कि नगर पालिका की 1 से 8 नंबर दुकाने स्व. विश्राम सिंह यादव के नाम से आवंटित की गई थी। इन दुकानों का व्यवसायिक प्रयोग किया जाना था लेकिन नियम विरुद्ध दुकानों का राजनीतिक प्रयोग किया जाने लगा और दुकानों को तोड़कर पार्टी कार्यालय बना दिया गया। अनुबंध के मुताबिक पिछले 1 साल तक का किराया जमा नहीं किया गया है। यही नहीं, बगैर अनुमति के कोई भी मूर्ति स्थापित नहीं की जा सकती है। ऐसे में बगैर अनुमति लिए ही प्रतिमा को स्थापित कर दिया गया है और टीनशेड भी डलवाया गया है। ऐसे में आवंटित दुकानों का अनुबंध खत्म किया जा सकता है। प्रतिमा खुद स्थापित की गई है। ऐसे में प्रतिमा के हटाने का हरजा खर्चा भी पार्टी को ही देना होगा और टीनशेड हटाने का भी खर्चा पार्टी को हटाना देगा। ऐसे में नगर पालिका से नोटिस मिलने के बाद समाजवादी पार्टी में खलबली मच गई और रातों-रात प्रतिमा को हटा दिया गया। अब इस पूरे मामले में जिलाध्यक्ष समेत कोई भी पार्टी पदाधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। हालांकि प्रतिमा हटाते समय मौके पर मौजूद सपा कार्यकर्ता आलोक वर्मा ने प्रतिमा हटाने को लेकर विरोध जाहिर किया जिन्हों कहा भी कि नेता जी की प्रतिमा स्थापित की गई थी। प्रशासन को नागवार गुजरा और उन्होंने नोटिस थमा दिया और धमकाया जिसके बाद प्रतिमा हटा ली गई है। नेता जी को भारतीय जनता पार्टी ने ही पद्म विभूषण से सम्मानित किया था लेकिन राजनीतिक विरोध के चलते मूर्ति हटवा दी गई।

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