रामपुर महोत्सव का सांसद ने किया शुभारम्भ
गोविन्द वर्मा
बाराबंकी। तहसील नवाबगंज स्थित रामपुर धाम में होने वाले भव्य महोत्सव का सांसद उपेन्द्र सिंह रावत द्वारा शुभारंभ किया गया। उद्घाटन के बाद सांसद ने मंदिर में पूजा अर्चना कर परिवार की सुख समृद्धि के साथ ही जिले की खुशहाली के लिए दुआ मांगी। मेला कमेटी द्वारा की गई तैयारियों ने लोगों का दिल जीत लिया। काफी मेहनत से सजाया गया चतुर्भुजी महराज का मंदिर व मुख्य पंडाल अपनी अलग छटा बिखेर रहे थे।आगामी 30 नवम्बर तक चलने वाले इस महोत्सव में प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जायेंगे। महोत्सव में आने वाले लोगों की सुरक्षा व सुविधा के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। कमेटी के अध्यक्ष आनन्द मोहन व सदस्य रामवीर ने बताया कि आगामी 28 नवम्बर को समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को अवध गौरव सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के मनोरंजन की पूरी व्यवस्था मेला कमेटी द्वारा की गई है। मंदिर के महंत फूलसिंह दास ने बताया कि यह मंदिर कई सौ साल पुराना है। भारत के कोने कोने में चतुर्भुज मंदिर की शाखाएं फैली हुई है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां पर दीपदान का विशेष महत्व है। प्रचलित कथा के अनुसार प्राचीन काल में साधु संतों की एक टोली प्रयागराज से प्रवास समाप्त होने पर तप करने के लिए नैमीसारणय को जा रही थी। पैदल मार्ग से चलते हुए वह रामताराम चतुर्भुज आश्रम पहुंचकर विश्राम के लिए रुकी। कहते हैं कि संतों को महंत रामतराम द्वारा भोजन के लिए प्रसाद परोसा जा रहा था तभी उनकी लंगोटी खुल गई।वह प्रसाद परोसने में इतने लीन थे कि उनका ध्यान लंगोटी की तरफ नहीं गया। कुछ विनोदी स्वभाव के साधुओं ने कहा कि महराज आपकी लंगोटी खुल गई है उसे ठीक कर लें। इस पर बाबाजी ने कहा कि मैं प्रभु की सेवा में लगा हुआ हूं सब कुछ उन्हीं का है प्रभु को जो कुछ ठीक लगेगा वही करेंगे। लोगों का कहना है कि फिर भगवान विष्णु को अपने भक्त का निश्छल प्रेम देखकर उसके शरीर में समाहित होना पड़ा। महंत का पूरा शरीर प्रकाशमान हो उठा। उनके शरीर में प्रकट हुए दो अन्य हाथों ने उनकी लंगोटी बांधी। सभी संत महात्माओं को भगवान विष्णु ने दर्शन दिए और चारों तरफ रामताराम चतुर्भुजी महराज की जय जयकार होने लगी।

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