महंगाई की गिरफ्त में जकड़ा आमों का बाजार
राजेश श्रीवास्तव
अयोध्या। गरीब तथा मध्यम वर्गीय परिवारों को आम का स्वाद खट्टा लगने लगा है। महंगाई की गिरफ्त में जकड़े बाजार का आलम यह है कि आमों का राजा दशहरी ही नहीं चौसा, लंगड़ा, फजली और सफेदा तक गरीबों की थाली से दूर हो गया है। व्यापारी राम कुमार कहते हैं कि गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष आम की आवक कम होने तथा स्थानीय आम के बागानों से माल दूसरे जिलों में सप्लाई किए जाने से आमों के भाव बढ़ गए हैं। थोक फल मंडी का सूनापन बताने के लिए काफी है कि लखनऊ, मुंबई तथा वाराणसी से आने वाले आमों की आवक गत वर्ष की अपेक्षा कम है। गत वर्ष फल मंडी आमों से पटा रहा, वही इस वर्ष उसकी तुलना में बहुत कम है।
गत वर्ष 25 से 30 प्रति किलोग्राम बिकने वाली दशहरी वर्तमान में 60 से 70 प्रति किलोग्राम के भाव में मिल रहा है। इसी प्रकार बनारसी लंगड़ा 70, चौसा 60, सफेदा 50 से 60, मुंबई या लंगड़ा 60 से 70 तथा छोटी दशहरी 50 और फजली 50 प्रति किलोग्राम के भाव में है। ऐसा नहीं कि आमों के भाव एकाएक बढ़ गए हो। आमों की पहली फसल के बाजार में आते ही महंगाई का तड़का लग गया था। जिसका असर अभी तक दिखाई दे रहा है। गत वर्ष आम के दामों पर गौर किया जाए तो बड़ी दशहरी 40, छोटी दशहरी 25, सफेदा 30, चौसा 30, लंगड़ा 35 तथा फजली 30 के भाव में मिल रहा था। उपभोक्ता रमेश व राजू कहते हैं कि अब तो स्थिति यह हो गई है कि आम के दाम पूछने पर दुकानदार सीधे 100 का तौल बताता है। जिस घरों में तीन से चार किलो आम जाता रहा, वहां अब एक, दो किलो से ही काम चलाया जा रहा है। वे कहते हैं कि अब आम खाकर मन को नहीं भरा जा सकता है। बस, अब आम का केवल स्वाद लेना रह गया है।
आधुनिक तकनीक से करायें प्रचार, बिजनेस बढ़ाने पर करें विचार
हमारे न्यूज पोर्टल पर करायें सस्ते दर पर प्रचार प्रसार।













