धूमधाम से मनाई गई गुरु गोबिंद सिंह की जयंती

धूमधाम से मनाई गई गुरु गोबिंद सिंह की जयंती

जीपी वर्मा
बाराबंकी। सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह की जयंती महर्षि विद्या मंदिर नगर में पूरे उत्साह के साथ मनाई गई। प्रधानाचार्य प्रदीप श्रीवास्तव ने गुरु गोविंद सिंह के चित्र पर टीका लगाकर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया। उन्होंने कहा कि सिख धर्म में गुरु गोबिंद सिंह का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।

गुरु गोबिंद सिंह ने सिख धर्म के लिए कई नियम बनाए, जिसका पालन आज भी किया जाता है। उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब को गुरु के रूप में स्थापित किया। उन्होंने सामाजिक समानता का पुरजोर समर्थन किया। गुरु गोबिंद सिंह दमन और भेदभाव के खिलाफ खड़े हुए। इसलिए लोगों के लिए एक महान प्रेरणा के रूप में उभरे। वे सिख धर्म के 9वें गुरु तेग बहादुर के पुत्र थे।

शौर्य और साहस के प्रतीक गुरु गोबिंद सिंह का जन्म पौष माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को बिहार के पटना में हुआ। कहा जाता है कि सिखों के लिए 5 चीजें- बाल, कड़ा, कच्छा, कृपाण और कंघा धारण करने का आदेश गुरु गोबिंद सिंह ने ही दिया था। इन चीजों को ‘पांच ककार’ कहा जाता है, जिन्हें धारण करना सभी सिखों के लिए अनिवार्य होता है।

गुरु गोबिंद सिंह का जीवन लोगों के लिए काफी प्रेरणादायक रहा। कहा जाता है कि अपने पिता गुरु तेग बहादुर की शहादत के बाद मात्र 9 साल की उम्र में गुरु गोबिंद सिंह ने गुरु की जिम्मेदारी ली।

उन्होंने छोटी सी उम्र में ही धनुष-बाण, तलवार, भाला आदि चलाने की कला भी सीखी और फिर अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा में गुजार दिया। गुरु गोबिंद सिंह के जीवन से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमें जीवन में कभी भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए, चाहे परिस्थिति कितनी भी विषम क्यों न हो। हमेशा अपने व्यक्तित्व को निखारने के लिए काम करते रहना चाहिए।

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