जर्जर पानी की टंकी को आधा तोड़कर ठेकेदार गायब
हादसे की संभावना से लोग चिंतित
पवन मिश्र
कौशाम्बी। नगर पालिका परिषद भरवारी के वार्ड नम्बर 20 केशव नगर में नलकूप के पूर्व में पानी सप्लाई के लिए पानी टंकी बनी हुई थी। यह पानी की टंकी भरवारी में सन् 1967 में जलकल विभाग द्वारा बनवाई गयी थी। जिससे नगर पालिका भरवारी में पीने के पानी की सप्लाई की जाती थी।
लगभग बीस वर्ष तक सब कुछ सही चलने के बाद अचानक से पानी की टंकी जगह-जगह से जर्जर हो गयी और नगर पालिका द्वारा इसका इस्तेमाल भी बंद कर दिया गया और लोगों को पम्प हाउस से सप्लाई दी जाने लगी। पानी टंकी के आस पास घनी आबादी है टंकी के ठीक सामने प्राचीन राधा कृष्ण मंदिर भी है। इसके चलते लोगों का आवागमन रहता है।
स्थानीय लोगों ने इस निस्प्रयोज्य जर्जर पानी टंकी को गिराने के लिए बीते सन् 2018 में नगर पालिका परिषद भरवारी के तत्कालीन ईओ गिरीश चंद्र से कहा था। ईओ ने इसके लिए डीएम को पत्राचार भी किया था। पत्र को संज्ञान में लेकर तत्कालीन डीएम मनीष कुमार वर्मा ने इस जर्जर पानी की टंकी की जांच कराकर गिरवाने के लिए नगर पालिका को निर्देशित किया था।
फिर भी ये जर्जर पानी की टंकी नही गिराई गयी थी। इसके अलावा 2020—2022 मई में इस जर्जर पानी की टंकी को पूरा गिरवाने के लिए 1 लाख 22 हजार रुपये का टेंडर एक चर्चित ठेकेदार ने ले लिया और ठेकेदार द्वारा एक सप्ताह के भीतर इसके ऊपरी हिस्से को गिरा दिया गया। आधी टंकी गिराकर ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर गायब हो गया।
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लगभग बीस वर्ष तक सब कुछ सही चलने के बाद अचानक से पानी की टंकी जगह-जगह से जर्जर हो गयी और नगर पालिका द्वारा इसका इस्तेमाल भी बंद कर दिया गया और लोगों को पम्प हाउस से सप्लाई दी जाने लगी। पानी टंकी के आस पास घनी आबादी है टंकी के ठीक सामने प्राचीन राधा कृष्ण मंदिर भी है। इसके चलते लोगों का आवागमन रहता है।
स्थानीय लोगों ने इस निस्प्रयोज्य जर्जर पानी टंकी को गिराने के लिए बीते सन् 2018 में नगर पालिका परिषद भरवारी के तत्कालीन ईओ गिरीश चंद्र से कहा था। ईओ ने इसके लिए डीएम को पत्राचार भी किया था। पत्र को संज्ञान में लेकर तत्कालीन डीएम मनीष कुमार वर्मा ने इस जर्जर पानी की टंकी की जांच कराकर गिरवाने के लिए नगर पालिका को निर्देशित किया था।
फिर भी ये जर्जर पानी की टंकी नही गिराई गयी थी। इसके अलावा 2020—2022 मई में इस जर्जर पानी की टंकी को पूरा गिरवाने के लिए 1 लाख 22 हजार रुपये का टेंडर एक चर्चित ठेकेदार ने ले लिया और ठेकेदार द्वारा एक सप्ताह के भीतर इसके ऊपरी हिस्से को गिरा दिया गया। आधी टंकी गिराकर ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर गायब हो गया।
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