खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया

खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया

रूस्तमनगर के कटे बंधे का मरम्मत कार्य शुरू
तेजस टूडे ब्यूरो
अब्दुल मोबीन सिद्दीकी
उतरौला, बलरामपुर। मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और ग्रामीणों का सपना साकार हुआ। 1 जुलाई को ग्राम रूस्तमनगर के लोगों की सामूहिक चेतना और संघर्ष आखिरकार रंग लाई। राप्ती नदी के किनारे स्थित कटे हुए बंधे की मरम्मत का कार्य मंगलवार को युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। ग्रामीणों द्वारा सोमवार को उपजिलाधिकारी को सौंपे गए शिकायती पत्र के बाद प्रशासन हरकत में आया और मंगलवार को जिले तथा तहसील स्तर के तमाम आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
बताते चलें कि बीते वर्ष 2023 में आई बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त हुए इस बंधे को लेकर ग्रामीणों में भारी चिंता थी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी थी कि यदि मानसून से पूर्व बंधे की मरम्मत नहीं कराई गई तो उनकी जान-माल और कृषि भूमि को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। सोमवार को दिए गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने प्रशासन को यह भी प्रस्ताव दिया था कि यदि शासन से कोई मदद नहीं मिलती तो वे खुद चंदा इकट्ठा करके मरम्मत करने को तैयार हैं। बस प्रशासनिक अनुमति मिलनी चाहिए। मंगलवार को उपजिलाधिकारी उतरौला, तहसीलदार उतरौला, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग, सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे और बंधे की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल मरम्मत कार्य शुरू करा दिया। जेसीबी मशीनें, मजदूरों की टीम और विभागीय संसाधन मौके पर भेज दिए गए हैं।
उपजिलाधिकारी उतरौला ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि बंधे की मरम्मत शीघ्र पूरी कर ली जाएगी और किसी भी दशा में उन्हें अब बाढ़ की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को शासन स्तर पर भी रिपोर्ट किया गया है और आपदा प्रबंधन की ओर से भी सहायता ली जा रही है। बांध निर्माण कार्य शुरू होते ही ग्रामवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्राम प्रधान गुलाब चंद ने कहा, “यह जीत पूरे गांव की एकजुटता की है। हमने जनहित में आवाज उठाई और प्रशासन ने उसे सुना।”
ज्ञापन देने वालों में अंबिका प्रसाद, अर्जुन प्रसाद, अनवारूल हसन, राजेंद्र प्रसाद, अशरफी लाल, गंगाराम, राम सजन, प्रमोद यादव, सुनील यादव आदि ने प्रशासन का आभार जताया। जहां प्रशासन की तत्परता से जनविश्वास मजबूत हुआ है, वहीं यह उदाहरण उन मामलों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है, जहां जनता की आवाज़ अनसुनी रह जाती है। यह घटना दर्शाती है कि जब जनहित में सामूहिक रूप से मुद्दे उठाए जाते हैं तो प्रशासन को भी जवाब देना पड़ता है। अब उम्मीद की जा रही है कि राप्ती नदी के इस रौद्र रूप का सामना इस बार ग्रामीणों को नहीं करना पड़ेगा और समय से पहले बांध की मरम्मत कार्य पूर्ण हो जाएगा।

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