जिले के मशहूर टेलर का शव एक माह बाद नदी के किनारे मिला
आरएल पाण्डेय
लखनऊ। जिले के आलमनगर स्थित एक प्रसिद्ध टेलर के दुकान के मालिक अजहर अली के गायब होने के एक माह पश्चात उमरी बेगमगंज गोंडा के सरयू नदी के किनारे उसका शव क्षत-विक्षत अवस्था में पाया गया। परिजनों ने उसकी पहचान उसकी जैकेट तथा कमीज की शर्ट पर टेलर की दुकान का लोगो और पैंट की जेब में स्कूटर की चाभी से की। शव पूरी तरह कंकाल की अवस्था में था। स्थानीय पुलिस ने शव को सील कर पोस्टमार्टम हेतु जनपद रवाना कर दिया है।

घटना के अनुसार अजहर अली 36 वर्ष पुत्र असगर अली की आलम नगर में स्थित एक प्रसिद्ध टेलर की दुकान के मालिक थे। उनके अंडर कम से कम 2 दर्जन से अधिक लोग सिलाई का काम करते थे। 9 फरवरी को दोपहर 1 बजे अजहर अपने निजी एक्टिवा स्कूटर से दुकान से कृष्णा नगर में स्थित घर के लिए निकले थे। घर न पहुंचने पर परिवार वालों ने फोन करना शुरू किया परन्तु बेल जाने पर भी फोन नहीं उठा। शाम को परिजन परेशान होकर कृष्णा नगर स्थित पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई। सूचना दर्ज होते ही लखनऊ पुलिस तुरंत हरकत में आई और उसके फोन को सर्विलांस पर लगा दिया गया। सर्विलांस पर उसके फोन की लोकेशन जरवल स्थित घाघरा नदी के पास दिखाई पड़ी जिस पर पुलिस परिजनों को लेकर पुल के पास पहुंची तो वहां पर उसकी एक्टिवा स्कूटर खड़ी दिखाई पड़ी।
पुलिस ने स्कूटर की छानबीन की तो उसके डिग्गी में मोबाइल, घड़ी तथा पर्स मिल गया परंतु स्कूटर की चाभी नहीं मिली। उस समय अनुमान लगाया गया कि संभवत उसने नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली। तब से उसके परिजनों के द्वारा लगातार गोताखोरों को लेकर नदी में तलाश करते रहे। अजहर के पिता असगर अली ने बताया कि उनका पुश्तैनी गांव बरौली थाना उमरी बेगमगंज है। यहां पर भी अपने पट्टीदारों से नदी किनारे शव को तलाश करने के लिए कहा था। शनिवार को भी नदी के किनारे एक शव पड़ा होने की सूचना उनके ही पट्टीदारों ने दी तो उसका फोटो भेजने को कहा। फोटो में उसकी जैकेट से वह पहचान गए और तत्काल आनन-फानन कृष्णा नगर थाने को सूचना देते हुए उमरी नदी के किनारे पहुंच गए।
वहां उन्हें पैंट की जेब में स्कूटर की चाबी भी उन्हें मिली। लोगों को अजहर के घर से 75 किलोमीटर दूर सब कुछ व्यवस्थित करके नदी में कूदकर आत्महत्या कर लेने की घटना को संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं। बरौली स्थित उनके पट्टीदारों का कहना है कि असगर का परिवार पिछले 50 वर्षों से लखनऊ में रहकर ही टेलरिंग का कारोबार करके उन्होंने करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर ली थी। घर में किसी की भी चीज की कमी नहीं थी। बताया जा रहा है कि अजहर चार भाई थे जिसमें 2भाई विकलांग तथा एक जुड़वां भाई मजहर है। अजहर की शादी के 14 साल बीत जाने के पश्चात भी निसंतान थे जिसकी चिंता उन्हें बनी रहती थी। इस बाबत पूछे जाने पर थानाध्यक्ष करुणाकर पांडेय ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के पश्चात सभी पहलुओं पर गहन जांच की जाएगी।
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