फाइलेरिया उन्मूलन के लिये चलेगा अभियान, घर-घर जाकर खिलायी जायेगी दवा
तेजस टूडे ब्यूरो
गोविन्द वर्मा
बाराबंकी। लिम्फेटिक फाइलेरिया एक गंभीर रोग है जो आजीवन विकलांगता का कारण बन सकता है। इसका एकमात्र बचाव फाइलेरिया रोधी दवाएं (एल्बेंडाजॉल, डी.ई.सी. एवं आइवरमेक्टिन) का सेवन करना है। सर्वजन दवा सेवन अभियान के तहत 10 से 25 फरवरी तक स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर निःशुल्क दवा खिलाएंगे। यह दवा पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी है जो फाइलेरिया संक्रमण को रोकने में मदद करती है। यह बातें मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अवधेश यादव ने सीएमओ सभागार में आयोजित जनपद स्तरीय मीडिया कार्यशाला में कही।
साथ ही आगे कहा कि फाइलेरिया रोग के लक्षण मच्छर काटने के 5 से 15 वर्षों के बाद नजर आते हैं। एक बार बीमारी हो जाने पर इसका कोई इलाज नहीं है। ऐसे में बचाव ही इसका एकमात्र उपाय है। गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को छोड़कर सभी को यह दवा खानी है।
वीबीडी नोडल अधिकारी डॉ. डीके श्रीवास्तव ने बताया कि फाइलेरिया रोग मुख्य रूप से शरीर के लटकने वाले अंगों को प्रभावित करता है। यदि समय पर बचाव नहीं किया गया तो इन अंगों में असामान्य सूजन हो सकती है। वर्तमान में जनपद में 805 हाइड्रोसील और 3501 लिम्फोडिमा के मरीज चिन्हित किए गए हैं।उन्होंने बताया कि इस वर्ष यह अभियान जनपद के 9 ब्लॉकों देवा, फतेहपुर, रामनगर, दरियाबाद, राम सनेही घाट, सिद्धौर, हरख, जाटा बरौली और अर्बन क्षेत्र में चलाया जाएगा। पिछले साल के अभियान के बाद किए गए नाइट ब्लड सर्वे में इन ब्लॉकों में माइक्रो फाइलेरिया रेट एक से अधिक पाया गया था जबकि अन्य क्षेत्रों में यह दर एक से कम थी।
जिला मलेरिया अधिकारी सुजाता ठाकुर ने बताया कि जनपद की कुल जनसंख्या 38 लाख है जिसमें 9 ब्लाकों के दो वर्ष की आयु से अधिक 22 लाख लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस अभियान में 1795 टीमों का गठन किया गया है और निगरानी के लिए 299 सुपरवाइजर तैनात किए गए है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता दवा अपने सामने खिलाएंगे और किसी भी हालत में दवा बाद में खाने या घर ले जाने के लिए नहीं दी जाएगी।
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