विश्व तम्बाकू निषेध दिवस
डा. प्रदीप चौरसिया
तम्बाकू का सेवन नशे की बीमारी है। विशेषज्ञ मनोचिकित्सक की देख—रेख में इससे मुक्ति सम्भव है। तम्बाकू सेवन से होने वाले नुकसानों के प्रति जागरूक करने हेतु हर वर्ष 31 मई को विश्व तम्बाकू निशेष दिवस मनाया जाता है। सर्वविदित है कि तम्बाकू में कैंसर कारक तत्व विद्यमान होते हैं। इसके लगातार सेवन से दिमागी रसायनों में बदलाव होता है और यह नशे की बीमारी में तब्दील हो जाता है। तम्बाकू का कई अलग अलग रूपों में लोग उपभोग करते हैं।

खैनी, हुक्का/चिलम, पान मसाला और पान पत्ते के साथ तम्बाकू का सेवन प्रचलित है। इसके सेवन से मुँह, गले का कैंसर होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इस बड़े खतरे की छांव में तम्बाकू का सेवन आपको अनिद्रा, तनाव, उलझन इत्यादि मानसिक बीमारियों से भी ग्रसित करता है। एक विशेषज्ञ मनोचिकित्सक डी एडिक्शन प्रोग्राम के तहत उचित दवाओं सहित अन्य थिरेपी का इस्तेमाल करके व्यक्ति को तम्बाकू की नशा ख़ोरी से पूर्णतः निज़ात दिला देता है।
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