
एशिया के देश स्वेच्छाचारिता, भ्रष्टाचार और हिंसा के एक नए दौर में हैं। आम लोगों के जीवन में असुरक्षा बढ़ी है। इसका एक ताजा उदाहरण नेपाल में सोशल मीडिया को नियंत्रित करने पर युवाओं के विद्रोह रूप में सामने आया है। वे बड़े पैमाने पर बेरोजगारी के शिकार थे। बड़ी संख्या में नेपाली युवा अपने देश में काम न पाकर दुबई जैसे नगरों में जहालत के बीच काम करने जाते हैं और रोज काठमांडू एयरपोर्ट पर 4–5 युवाओं की लाशें पहुंचती हैं। दूसरी तरफ हर राजनेता के घर रुपयों की संदूकों से भरते जा रहे थे।
बुरी आर्थिक दशा से परेशान होकर युवा सोशल मीडिया में मुखर होने लगे। उनकी बातें दुनिया के दूसरे देशों में पहुंच रही थीं। सरकार ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिए। नौजवानों को लगा, उनका श्वासरुद्ध हो गया है। वे लाखों की संख्या में अचानक सड़कों पर उमड़ पड़े। उनका दमन हुआ, गोली कांड में बीसाधिक व्यक्ति मारे गये। उनका आक्रोश बढ़कर संसद, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के घरों में आगजनी तक पहुंच गया। उल्लेखनीय है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध इस आवाज के पीछे एक अत्यंत लोकप्रिय नेपाली पॉप गायक सुदान है।
सोशल मीडिया एक खुला आकाश है। इसमें पतंग उड़ाएं, मिसाइल छोड़ें या झूठ के बगुले उड़ाएं, समाज को विशेषकर युवाओं को कई बंधनों से गुजरने के बाद यह आकाश मिला है। इस आकाश को उनसे छीना नहीं जा सकता। हर वंचना, सूचनाओं की वंचना भी हिंसा को जन्म देती है और समाज का माहौल खराब करती है। कहीं भी कुछ मूल्यवान छीनने पर वही घटना होगी जो नेपाल में हुई। यह कैसी विडम्बना है कि अब सोशल मीडिया ही आखिरी शरणस्थल है। यह 21वीं सदी में व्यवस्था का सेफ्टी बाल्व भी है।
यह भी कहने की जरूरत है कि इन घटनाओं से खुश होकर जो घर बैठे भारत में भी ऐसी किसी घटना की प्रतीक्षा कर रहे हैं, वे भ्रम में हैं। नेपाल एक छोटा और बहुत कम विविधता वाला देश है, इसलिए यहां यह संभव हुआ। नेपाल की राजशाही को उलटने के समय भी कुछ ऐसा ही दृश्य था।
डा. ब्रजेश यदुवंशी
सम्पादक/साहित्यकार
मान्यता प्राप्त पत्रकार
उत्तर प्रदेश शासन।
आधुनिक तकनीक से करायें प्रचार, बिजनेस बढ़ाने पर करें विचार
हमारे न्यूज पोर्टल पर करायें सस्ते दर पर प्रचार प्रसार।






