ध्यान रखना होगा, आज के जमाने के नये सोशल व्यक्तिगत दायित्वों का
इन 26 बातों से आप अपना जीवन सुखी कर सकते हैं!
करण समर्थ
मुंबई। कोई कुछ भी कहें या माने लेकिन आज हम सब किसी ना किसी हद तक फोन, सोशल मिटिंग्ज तथा मीडिया पर निर्भर हो चुके हैं। और आज हमारे कई सारे काम तो इनके बगैर संभव ही नहीं, तो इसकी सहजता से इस्तेमाल करने के कुछ नियम भी फाॅलो करना आवश्यक हुआ है। यदि हम कुछ नियमों को नहीं मानते हैं तो समाज में हमारा नाम खराब हो सकता है, लोग हमें असभ्य मान सकते हैं। इसलिए कुछ सहज नियमों को अपनी आदत बना लें….
आप कभी-भी किसी को फोन करते हो, और सामनेवाला आपके फोन का जवाब नहीं दे रहा है तो आप उसे मात्र दो बार ही काॅल करें। जब वह आपको जवाब नहीं दे रहा है तो आप उसे लगातार बार-बार फोन ना करें। हमें यह समझना होगा कि सामनेवाला किसी महत्वपूर्ण कार्य में व्यस्त हैं या वह आपके साथ बात करने कि स्थिति में नहीं है।
परन्तु यदि आपको उस व्यक्ति से किसी आवश्यक विषय पर बात करनी ही है, तो आप उसे अपने फोन करने के कारण का संदेश भेजकर, उसे आपकी बात से अवगत करा सकते हैं।
किसी कारणवश आपने किसी से भी कितने भी पैसे उधार लिए है, तो देनेवाले ने मांगने से पहले ही उसे लौटा दे। तो उनके मन में आपकी छबी एक इन्सान के रूप में बनेगी। लेकिन यदि वह भूल गए हैं, यह मानकर, अब लौटाने की जरूरत नहीं है या फिर वह मांगने पर देते हैं, यह सोच गलत तथा अव्यावहारिक है। इससे वह आपके बारे में सकारात्मक सोच रखेंगे और यदि भविष्य में आपको फिर कोई मदद चाहिए होगी तो वह सहायता करने के सोच सकता है। वरना आप मदद लेकर भूल जाते हो या उधार लिया हुआ पैसा ना लौटाना आपकी आदत है, यह मानकर आपको सहायता नहीं करेंगा।
कभी कोई आपको किसी रेस्टोरेंट में खाना खाने लेकर जाएं तो आप अपनी पसंद से ज्यादा जो आपको खाना खाने लेकर गया है उसकी पसंद तथा बजट के हिसाब से ही ऑर्डर करें। या सबसे अच्छा तरीका यह होगा कि, आप उसे केवल आपको किस चीज़ों से परहेज़ है वह बताकर, आपको जो चाहिए वह मंगाएं ऐसा आग्रह करें। इससे आप स्वच्छ तथा सादगी भरे व्यक्तमत्व के व्यक्ति हैं ऐसा प्रतीत होगा और आपका यजमान खुश होगा, इससे खाने पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
आप जब भी किसी रिश्तेदार, दोस्त या परिचित को मिलते हो, तब आप उन्हें कोई व्यक्तिगत सवाल-जवाब करे या बीना पूछें ना ही किसी व्यक्तिगत मामलों में राय-मशविरा भी ना दे। उन्हें ऐसे कोई सवाल ना पूछें जैसे कि, आपका वेतन या उत्पन्न कितना है? यह आपका स्वयं का मकान है या आप किराए से रहते है? आपके घर में कोई दिखाइ नहीं देता? आपको कोई बच्चे नहीं है ? आप अपना घर कब खरिदोंगे? आपके पास कोई गाडी क्यों नहीं है? आपको समझना है, इन सब बातों से आपका कोई संबंध नहीं है। आपको किसी की व्यक्तिगत मामलों में दखलअंदाजी करने का कोई हक तथा कारण भी नहीं है। आप जिस काम था कारण किसी से मिलते-जुलते हो, बस उतने तक ही सीमित रहे यह अच्छा है।
यदि आप किसी के घर जाते हो या कोई आपके घर आते हैं, तो अपनी चर्चा में सामाजिक राजनीतिक मामलों या आर्थिक व्यवस्था पर चर्चा करने से बचें। यदि ऐसी परिस्थिति होने पर अपने किसी भी मुद्दे को बहस तक ना पहुंचने दे क्योंकि आप की यह चर्चा या बहस किसी भी तरह से समाज या देश को बदलने में सक्षम नहीं है। पर आपके संबंध टूटने या मात्र ख़राब करनें में सहायक हो सकते हैं, तो ऐसे विषयों पर चर्चा करने से दूर रहें।
आप कभी किसी परिचित या दोस्त के साथ टॅक्सी में जाते हो हो आप उसका किराया देने की पेशकश करें, या किराए का कुछ हिस्सा देने का प्रयास करेंगे तो उस व्यक्ति को यह बात हमेशा याद रहेंगी।
यदि आप किसी के साथ कहीं बाहर जाते हों तो आपके पिछे आने वाला व्यक्ति कोई भी हो, आप उनके लिए दरवाजा पकड़कर रखें तो आपके चरित्र को बड़ा माना जाएगा। आपके पीठ पिछे इस छोटी सी बात की तारीफ जरूर होगी।
जब भी दुसरा कोई बात करता हो तब उसे बीच में टोकना या अपनी बात नहीं रखनी चाहिए। यदि आपको उस विषय के बारे में जानकारी हो या कोई सवाल हो या आपकों कोई टिप्पणी करनी हो तो भी जब तक पहले बात करनेवाले कि बात पूरी नहीं होती तब तक हमें केवल ध्यान से सूनना है। उसके बाद आवश्यकता होगी तो ही आप उनसे सवाल पूछे। इससे आप अनुभवी, ज्ञानी तथा उच्च स्तरीय व्यक्ति हो यह स्पष्ट होगा।
जैसे अंग्रेजी 6 यह उल्टा करने पर 9 दिखाई देता है, वैसे किसी बात पर किसी की विचार सुनने में कोई नुकसान नहीं है, हम चाहें तो उसी बात को फिर किसी अनुभवी ज्ञानी जानकारों से दुबारा पड़ताल कर सकते हैं। लेकिन उसी वक्त विचार व्यक्त करनेवाले से बिल्कुल ही बहस या वाद-विवाद नहीं करना चाहिए।
हम किसी से बात करते हैं, उस समय हमें उनकी आंखों में देखकर उनकी बात ध्यान से सूननी चाहिए। वह बात करते वक्त हमें किसी कारणवश यहां वहां या अपने मोबाइल में नहीं देखना चाहिए।
हम किसी से हंसी-मजाक करते हैं और हमें यह बात अच्छी लगती हैं पर यदि जिसके साथ हम यह करते हैं उसे अच्छा नहीं लगता होगा तो हमें तुरंत अपनी हरकतों को रोकना होगा और भविष्य में फिर कभी इस बात को दोहराया नहीं चाहिए। वैसे ही आवश्यकता हो तो उनसे सहजता से माफी भी मांगनी चाहिए।
आपको जिनसे मदत चाहिए उन्हें हमेशा, कृपया, कहें और जो आपको मदत कर रहै या मदत किए है, उनको तुरंत धन्यवाद भी कहकर आप उनके प्रति कितने उत्तरदायित्व है, इसका परिचय दें। तो वहीं इन्सान आपको आवश्यकता पड़ने पर फिर मदत करने तैयार होंगा।
आवश्यकता ना हों तो भी किसी की अच्छाईयां की प्रशंसा सार्वजनिक तौर पर करें और किसी की बुराई करनी हो व्यक्तिगत रूप से करें। इससे आपकी छबी हमेशा तेजस्वी बनी रहेंगी और आपकी बात का वजन तथा महत्व बना रहेगा।
अक्सर कुछ लोग किसी के दुबलेपन या मोटापे पर टिप्पणी करते हैं, लेकिन इस कारण वह व्यक्ति दुःखी या नाराज होता है। वैसे दुसरे लोग दुबले-पतले है या मोटे हैं इससे हमें कोई मतलब नहीं होना चाहिए। आप केवल, उन्हें आप अच्छे दिखते हो इतना ही कहेंगे तो बेहतर होगा। अर्थात अगर वह स्वयं चाहें और आपको जानकारी हो, तो आप उन्हें सही सलाह देकर उन्हें योग्य मार्गदर्शन कर सकते हैं। इससे वह व्यक्ति या परिवार आपका सम्मान करेंगे।
कोई भी आपको अपने मोबाइल पर फोटो दिखाए तो आप गलती से भी फोटो आगे-पीछे ना करें। क्योंकी अगला या पिछले फोटो के बाद क्या होगा इसका हमें पता नहीं होता, इससे आप स्वयं तथा वह व्यक्ति भी अनकन्फर्मटेबल हो सकतें हैं। आप केवल वह जो दिखाएं जो सामनेवाला आपको दिखाएं।
• हम अपने अड़ोस-पड़ोस के लोगों से भलीभांति परिचित होते हैं पर हमेशा यह प्रयास हों कि आप उनके सोशल मीडिया पर पोस्ट ना करें या वहां किसी बात पर चर्चा भी ना करें। इससे बीना कारण आप दोनों भी एल्युजन मोड़ में जाकर अपने संबंधों को तोड़ सकते हैं।
• आपको किसी से किसी तरह की सहायता चाहिए होगी जब भी पहले आप उससे जान लें कि वह आपको सहयोग करने की स्थिति में है या नहीं, उसके बाद ही उससे अपनी परेशानी पर बात करें।
• आपके कोई परिचित आपको हमारी डाक्टर के पास जा रहे हैं तो आप उनसे बीना कोई पूछताछ किए बगैर, आपके वहां सबकुछ ठिक हो ऐसी आशा करते हैं, इतना ही कहेंगे। आप उनसे कारणों के बारे में कुछ नहीं पूछेंगे तो सामनेवाले को सहजता महसूस होंगी। यदि वह स्वयं आपसे अपने रोग के विषय में बात करते हैं तब आप उन्हें आपके पास सही जानकारी हो तो दे वरना आप उनकी हिम्मत बनाएं और ना की उनको हमने यह सूना है कहकर ड़राए या व्दिधा मनःस्थिति में डालें।
• हमें हमेशा एक अंत्यत महत्वपूर्ण बात को याद रखना चाहिए कि, यदि आप किसी को सम्मान देते हों तो भी वह भी आपको सम्मान देंगे। फिर वह व्यक्ति कोई बड़ा उद्योगपती, आपका बाॅस हो या जाना-माना व्यक्ति हो या सफाई कर्मचारी हो, आप उसे जिस तरह से सम्मान देंगे वह यह बात हमेशा याद रखेंगे और आपकों भी वैसा ही सम्मान देंगे।
• हम अक्सर दुसरों के मामलों में कूद पड़ते हैं और लोगों को बीना मांगे सलाह सुझाव देते हैं और वह उसपर अंमल करें, तो यह कुछ ठीक नहीं है। हम अपने आप को आदत डालें कि जब-जब कोई हम से सलाह नहीं मांगते जब-तक हम उन्हें बीना मांगे सलाह सुझाव नहीं देंगे। इससे हम कहीं चीजों से बचते हैं।
• हम किसी को रास्ते पर मिलते हैं और हमने काला चश्मा पहना है, तो उनसे बात करते वक्त चश्मे को उतारकर बातचीत करनी चाहिए। इससे आप दोनों एक-दूसरे की आंखों में देखकर बात कर सकते हैं। शायद कई बार शब्दों से अधिक आंखों की भाषा प्रभावी होती है और वैसे भी कहावतं है, आंखें कभी झूठ नहीं बोलते।
• किसी कारणवश हम किसी को लंबे समय के बाद मिलते हैं उनसे उनकी उम्र, पारिवारिक तथा सांपत्तिक स्थिति पर कोई सवाल ना करें। आप केवल हमें इतने दिनों के बाद मिलकर खुशी हुई है आशा करते हैं कि आपके यहां भी सब खुशहाल होगा।
हमें कभी-भी किसी को भी अपने पैसें संपत्ति या व्यवसाय की बड़ी बड़ी बाते नही सुनानी चाहिए। आपका हेतू जाने बगैर सामनेवाला दुःखी या नाराज हो सकता है।
दुसरों के सामने अपने परिवार सदस्यों की अधिक प्रशंसा या बुराई भी नहीं करनी चाहिए। इससे कुछ लोग आपके सुख से नाराज़ या कुछ लोग आपके दुःख से खुश हो सकतें हैं और यह दोनों स्थितियां अपने लिए अच्छी नहीं है।
सबसे जरूरी बात, कभी-भी किसी के बच्चों के बारे में अपनी राय किसी को भी ना बताएं। वह आप की समस्या नहीं है, जिनके बच्चे है वह उसकी चिंता करेंगे आप को उनके मामलों में टिप्पणी करना या कूद से बचना चाहिए।
इतनी बातों पर ध्यान से अंमल करें तो हम अपने जीवन में कई सारी संभावित परेशानियों से दूर रहें सकते हैं।
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