निजी हास्पिटलों की सांठगांठ से पैथोलाजी सेण्टर में मरीजों के साथ की जा रही धोखाधडी
प्रदीप कुमार
हरदोई। शहर से लेकर कस्बा में स्वास्थ्य महकमा की मेहरबानियों के चलते कुकुरमुत्ते की तरह फल फूल रहे निजी अस्पताल व पैथोलॉजी सेंटर अधिकतर रजिस्ट्रेशन किसी और के नाम संचालित अप्रशिक्षित लोग कर रहे हैं जिसकी खामियाजा आम जनता को उठाना पड़ रहा है।
आपको बता दें कि हर गली मोहल्ले में पैथालोजी जांच सेंटर खुले हुए हैं, लेकिन हकीकत में देखा जाए तो किसी निजी अस्पताल की जांचे सबसे अधिक हो रही होगी उस सेंटर से डॉक्टर व पैथोलॉजी संचालक के द्वारा आंख मिचौली का खेल खेलकर गरीब मासूमों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जिससे गंभीर बीमारी जांच में दिखाकर रुपए ऐठने का कार्य धड़ल्ले से किया जा रहा है, जिसका जीता जागता मामला बावन रोड सेंठ नवल किशोर उर्मिला देवी हास्पिटल का सामने आया है जहां पर एम०बी०बी०एस० (एम०एस०) डॉक्टर विनीत वर्मा को दिखाने लिए मरीज अनुज कुमार सिंह पुत्र देवेंद्र सिंह निवासी नानक गंज झाला लखनऊ रोड हरदोई गया हुआ था, जहां पर डॉ विनीत वर्मा ने जांच कराने के लिए सारदा पैथालोजी डॉ के. के. सिंह टेक्नीशियन के यहां भेजा ब्लड सैंपल लेकर थोड़ी देर बाद रिपोर्ट मिल गई, ज्वाइंडिस अधिक बढ़ी बताई गई जिससे मरीज घबराया और तुरंत स्वास्तिका पैथालोजी पहुंचकर जांच कराई जहां पर रिपोर्ट आने पर कुछ जिए का तसल्ली पड़ी, मरीज दोनों जांचे लेकर डॉ विनीत वर्मा के यहां पहुंचा तो इनकी वाली जांच दिखाई तो घबरा कर कहने लगा मामला बहुत गंभीर है आप यहां चलकर कैसे आए आपको तो लेटकर आना चाहिए था, आनन फानन में दवाई लिखी भर्ती कराने के लिए कहा उसी बीच उसरी जांच रिपोर्ट दिखाई तो सन्य रह गया और तेज तेज बहस करने लगा उसके बाद पीड़ित ने जिलाधिकारी सीएमओ स्वास्थ मंत्री आनलाइन शिकायत दर्ज कराई और अपनी बीती मीडियाकर्मी को बताई खबर चलने के बाद स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए।
नोडल अधिकारी पंकज मिश्रा को जांच सौंपी गई और जांच करने के बाद बताया कि उसमे कोई ठोस चीज तो है नही और अलग अलग टाइम पर सैंपल लिए गए हैं तो अंतर तो होगा ही, पीड़ित का कहना कि लीवर 1480 सारदा पैथालोजी की रिपोर्ट में दिखा रहा तो वहीं स्वास्तिका पैथोलॉजी लीवर 168 ही है, वही आई, जी, आर, एस 400 15523010942 में आख्या प्रस्तुत है कि डॉ विनीत वर्मा एमबीबीएस एम एस है इसका अस्पताल रजिस्टर्ड है, और जो मेरे द्वारा जांच कराई गई है।
उसमे अलग अलग समय पर लिए गए सैंपल अलग अलग मशीन में रीडिंग में भिन्नता असामान्य नही है। सीएमओ को शिकायत निस्तारित करने के लिए भेज दिया गया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या इसी तरह स्वास्थ विभाग के जिम्मेदार अधिकारी गैर जिम्मेदार अनट्रेंड अप्रशिक्षित टेक्नीशियन से मोटी रकम लेकर बचाते रहेंगे और मासूम लोगों की जिंदगी के साथ लगातार खेलते रहेंगे और आम जनता इन लोगों की शिकार होती रहेगी।
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