
श्रीराम की बाल लीलाओं का प्रसंग सुनाते हुए महिलाएं झूमीं
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भगवान श्रीराम की भक्तों ने उतारी आरती
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व्यास ने बताया कि प्रभु श्रीरामचन्द्र ने बाल क्रीड़ा की और समस्त नगर निवासियों को सुख दिया। कौशल्याजी कभी उन्हें गोद में लेकर हिलाती-डुलाती और कभी पालने में लिटाकर झुलाती थीं। प्रभु की बाल लीला का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि एक बार माता कौशल्या ने श्री रामचन्द्रजी को स्नान कराया और श्रृंगार करके पालने पर पीढ़ा दिया। फिर अपने कुल के इष्टदेव भगवान की पूजा के लिए स्नान किया, पूजा करके नैवेद्य चढ़ाया और स्वयं वहां गई, जहां रसोई बनाई गई थी। फिर माता पूजा के स्थान पर लौट आई और वहां आने पर पुत्र को भोजन करते देखा। माता भयभीत होकर पुत्र के पास गई, तो वहां बालक को सोया हुआ देखा। फिर देखा कि वही पुत्र वहां भोजन कर रहा है। उनके हृदय में कंपन होने लगा। वह सोचने लगी कि यहां और वहां मैंने दो बालक देखे। यह मेरी बुद्धि का भ्रम है या और कोई विशेष कारण है? प्रभु श्री रामचन्द्रजी माता को घबराया हुआ देखकर मधुर मुस्कान से हंस दिए फिर उन्होंने माता को अपना अखंड अद्भूत रूप दिखलाया, जिसके एक-एक रोम में करोड़ों ब्रह्माण्ड लगे हुए हैं (माता का) शरीर पुलकित हो गया, मुख से वचन नहीं निकलता। तब आँखें मूंदकर उसने रामचन्द्रजी के चरणों में सिर नवाया। माता को आश्चर्यचकित देखकर श्री रामजी फिर बाल रूप हो गए। इस अवसर पर कथा संयोजक अजीत गुप्ता भाजपा, राज्य मंत्री रामकेश निषाद,नेता भाजपा जिलाध्यक्ष कल्लू सिंह राजपूत नगरपालिका अध्यक्ष मालती बासु अभिलाषा मिश्रा, शहर कोतवाल पंकज सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष लवलेश सिंह, नरेश, संजय कोनिया, धीरेन्द्र सिंह, आशीष, कमलेश, अमित, उपेंद्र गुप्ता, रेखा गुप्ता, प्रीति गुप्ता, मोना गुप्ता, सुनील, श्रीचंद गुप्ता, पुरूषोत्तम गुप्ता, अशोक गुप्ता, दयाराम निषाद, दिनेश निरंजन, राजेश सिंह राज, शिवम सिंह, अजय ओमर, पुष्पेन्द्र सिंह, अजय गुप्ता, अंकित गुप्ता, सूरज, अंशु आदि मौजूद रहे।











