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सोशल मीडिया क्यों बन गया है हैकरों का सबसे आसान निशाना

  • सोशल मीडिया क्यों बन गया है हैकरों का सबसे आसान निशाना

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हैकरों के लिए इसलिए आकर्षक लक्ष्य बन गए हैं, क्योंकि यहां लोगों की बड़ी संख्या सक्रिय रहती है और अधिकांश उपयोगकर्ता सुरक्षा के प्रति पर्याप्त सतर्क नहीं होते। सोशल मीडिया पर लोग अक्सर अपनी निजी जानकारी जैसे मोबाइल नंबर, ई-मेल, लोकेशन, तस्वीरें और सामाजिक संबंध साझा करते हैं। यही जानकारी हैकरों के लिए एक मजबूत आधार बन जाती है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति का अकाउंट हैक हो जाता है तो अपराधी उसकी संपर्क सूची में मौजूद लोगों को संदेश भेजकर आपात स्थिति का बहाना बनाते हैं, जैसे दुर्घटना, अस्पताल या किसी जरूरी भुगतान की बात। चूंकि संदेश परिचित व्यक्ति के अकाउंट से आता है, इसलिए कई लोग बिना जांच-पड़ताल किए पैसे भेज देते हैं। इस प्रकार सोशल मीडिया हैकिंग केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं रह जाती, बल्कि यह एक श्रृंखलाबद्ध साइबर ठगी का माध्यम बन जाती है।

हैकिंग के बदलते तरीके
साइबर अपराधियों ने लोगों के अकाउंट तक पहुंचने के लिए कई नए तरीके विकसित कर लिए हैं। इनमें से अधिकांश तकनीकी से ज्यादा मनोवैज्ञानिक होते हैं। कुछ ऐप्स मोबाइल में इंस्टॉल होते ही फोन की जानकारी तक पहुंच बना लेते हैं। इन ऐप्स के माध्यम से भी अकाउंट हैक किए जा सकते हैं।

1. फिशिंग लिंक का जाल
फिशिंग आज साइबर अपराध का सबसे सामान्य तरीका बन चुका है। इसमें अपराधी किसी बैंक, कंपनी या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के नाम से फर्जी लिंक भेजते हैं। जब उपयोगकर्ता उस लिंक पर क्लिक कर अपनी लॉगिन जानकारी दर्ज करता है तो वह सीधे अपराधियों के पास पहुंच जाती है।

2. ओटीपी ठगी
कई मामलों में अपराधी बैंक अधिकारी या कंपनी प्रतिनिधि बनकर फोन करते हैं और किसी बहाने से ओटीपी मांग लेते हैं। एक बार ओटीपी मिल जाने पर वे आसानी से अकाउंट एक्सेस कर लेते हैं।

3. कॉल फॉरवर्डिंग ट्रिक
हाल के समय में यह तरीका तेजी से सामने आया है। इसमें किसी बहाने से उपयोगकर्ता से एक डायल कोड डलवाया जाता है जिससे कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय हो जाती है। इसके बाद व्हाट्सएप या अन्य प्लेटफॉर्म का वेरिफिकेशन कॉल सीधे हैकर के फोन पर पहुंच जाता है।

4. नकली लॉगिन पेज
अपराधी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे दिखने वाले फर्जी लॉगिन पेज तैयार करते हैं। उपयोगकर्ता को पता ही नहीं चलता कि वह असली वेबसाइट पर नहीं, बल्कि नकली पेज पर अपनी जानकारी दर्ज कर रहा है।

5. संदिग्ध मोबाइल ऐप

6. मजबूत पासवर्ड बनायें
पासवर्ड में अक्षर, संख्या और विशेष चिन्ह शामिल करें। एक ही पासवर्ड सभी प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल न करें।

7. टू-स्टेप वेरिफिकेशन चालू करें
यह सुरक्षा का अतिरिक्त स्तर होता है। इससे कोई व्यक्ति पासवर्ड जानने के बाद भी बिना ओटीपी के लॉगिन नहीं कर पाएगा।

8. अनजान लिंक से बचें
किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांचें।

9. निजी जानकारी साझा न करें
फोन, ई-मेल या मैसेज के माध्यम से ओटीपी या पासवर्ड कभी साझा न करें।

10. संदिग्ध कॉल से सावधान रहें
बैंक, कूरियर या सोशल मीडिया कंपनियां फोन पर कभी पासवर्ड या कोड नहीं मांगतीं।

11. ऐप अपडेट करते रहें
मोबाइल ऐप और ऑपरेटिंग सिस्टम को समय-समय पर अपडेट करना जरूरी है।

12. सार्वजनिक वाई-फाई से बचें
खुले वाई-फाई नेटवर्क पर सोशल मीडिया या बैंकिंग अकाउंट लॉगिन करने से बचना चाहिए।

 

हैकिंग के शुरुआती संकेत
अक्सर लोग यह समझ ही नहीं पाते कि उनका अकाउंट हैक हो चुका है लेकिन कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिनसे समय रहते स्थिति का पता लगाया जा सकता है। यदि आपके सोशल मीडिया अकाउंट से अचानक अजीब पोस्ट या मैसेज जाने लगें, अनजान लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी जाने लगे या पासवर्ड अचानक काम करना बंद कर दे, किसी अज्ञात स्थान से लॉगिन नोटिफिकेशन आना, ई-मेल या मोबाइल नंबर बदल जाना। ऐसी स्थिति में तुरंत पासवर्ड बदलना और सुरक्षा सेटिंग्स की जांच करना जरूरी है। यह खतरे का संकेत हो सकता है। इसी तरह यदि किसी अज्ञात स्थान या डिवाइस से लॉगिन का नोटिफिकेशन मिले तो तुरंत सुरक्षा जांच करना आवश्यक हो जाता है।

सोशल मीडिया सुरक्षा के बुनियादी नियम
डिजिटल सुरक्षा के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उपयोगकर्ता कुछ बुनियादी नियमों का पालन करें तो अधिकांश साइबर हमलों से बचा जा सकता है। सबसे पहले मजबूत पासवर्ड का उपयोग जरूरी है। पासवर्ड में अक्षर, संख्या और विशेष चिन्ह शामिल होने चाहिए। एक ही पासवर्ड को कई प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल करना भी जोखिम भरा हो सकता है। दूसरा महत्वपूर्ण उपाय टू-स्टेप वेरिफिकेशन है। इससे पासवर्ड के अलावा एक अतिरिक्त सुरक्षा स्तर मिल जाता है। तीसरा, किसी भी अनजान लिंक या संदिग्ध मैसेज से सावधान रहना चाहिए। इंटरनेट पर दिखाई देने वाली हर चीज विश्वसनीय नहीं होती।

 

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