HomeTrendingइस वर्ष होलिका दहन कब है और होली कब खेली जायेगी?

इस वर्ष होलिका दहन कब है और होली कब खेली जायेगी?

  • इस वर्ष होलिका दहन कब है और होली कब खेली जायेगी?

सभी कारण पर भद्र और चंद्र ग्रहण पर सूतक काल पर उदय तिथि पर और पंचांग के अन्य सभी तत्वों पर विचार विमर्श करने के बाद अलका शिप्रा वैष्णवी ज्योतिष मौसम पूर्वानुमान एवं विज्ञान अनुसंधान केंद्र जौनपुर द्वारा पूरे प्रमाण के साथ यह स्थापित किया जाता है कि इस वर्ष 3 मार्च को सायंकाल 6:48 से रात 8:51 के बीच होलिका दहन किया जाना सबसे उचित होगा। अन्य कोई भी विकल्प नहीं है। धूलंडी अर्थात रंगोत्सव अर्थात होली के रंग का त्योहार 4 मार्च को मनाया जाएगा जो प्रतिपदा की तिथि है। इसका कारण नीचे दिया जा रहा है। होलिका दहन के लिए आवश्यक होता है कि पूर्णिमा की तिथि हो यदि उदय तिथि हो तो सबसे अच्छी बात है। भद्रा और सूतक की छाया न हो। सूर्यास्त के बाद का समय अर्थात प्रदोष काल होना चाहिए। चंद्र ग्रहण नहीं पढ़ना चाहिए और यह सभी एक साथ 3 मार्च को प्राप्त हो रहा है।
इस वर्ष होलिका दहन पर भद्रा की छाया है। 2 मार्च को पूर्णिमा की तिथि सायंकाल 5:55 से प्रारंभ हो रही है। 3 मार्च को 5:07 पर समाप्त हो रही है। इसके अतिरिक्त इस वर्ष पूर्णिमा की तिथि 3 मार्च को ही है, क्योंकि चंद्र ग्रहण प्रामाणिक रूप से पूर्णिमा के दिन पड़ता है। यह अटल वैज्ञानिक सत्य है। यह चंद्र ग्रहण दोपहर के बाद 3:20 से सायंकाल 6:47 तक रहेगा। इन सब कर्म से अनेक विद्वान और ज्योतिषी 2 मार्च को होलिका दहन आधी रात के बाद 12:50 से दो बजे रात के बीच करने का विचार देते हैं जो भद्रा पुच्छ की दशा है। यह भी बहुत उचित नहीं है, इसलिए इस कालखंड में होलिका दहन नहीं हो सकता और इसका सूतक काल 9 घंटे पहले प्रारंभ होता है, इसलिए भी इसके पहले होलिका दहन नहीं होगा, इसलिए इस वर्ष 3 मार्च की रात में 6-48 से रात में 8-50 तक होलिका का दहन विधि विधान पूर्वक मंत्रों के उच्चारण के साथ किया जाएगा। मंगलवार का दिन और बसंत की ऋतु होगी। पूर्णिमा की तिथि 2 मार्च को 5.55 पर लगेगी और 3 मार्च को सायंकाल 5.07 पर समाप्त हो जाएगी, इसलिए रंग वाली होली बिना किसी दुविधा के 4 मार्च को खेली जाएगी जिसमें कोई असमंजस की स्थिति नहीं है। जबरदस्ती कोई करे तो अलग बात है। धुलंडी अर्थात होली खेलना कृष्ण पक्ष प्रथम को होता है। इस प्रकार भी यह 4 मार्च को ही है। इसमें कोई भी संदेह की बात नहीं है। इतना अवश्य है कि के बाद ही होली खेलने प्रारंभ किया जाय। वह उत्तम रहेगा, क्योंकि इस समय से कृष्ण पक्ष प्रारंभ होगा।

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